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नहरों, रजवाहों में नहीं पानी, किसानों को परेशानी

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उरई। सूखा तो कभी बाढ़ तो कभी अन्ना मवेशी से परेशान किसानों के लिए अब पानी भी किसी मुसीबत से कम नहीं है। सिंचाई विभाग की हीलाहवाली के चलते खेतों तक नहरों का पानी नहीं पहुंच पा रहा हैं। जिससे फसलें सूख रही हैं। यूं तो हर बार फसलों की बुआई के पहले होने वाली सिंचाई बंधु की बैठकों में किसानों को भरपूर पानी उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन यह दावा एक पानी मिलने के बाद ही खत्म भी होने लगता है। यही इस बार भी हुआ। गेहूं, चना, मटर, लाही आदि की फसलों काफी मात्रा में आवश्यकता होती है। जिसमें सबसे अधिक पानी गेहूं की फसल में लगता है। किसानों की मानें तो नहरें व रजबहा फुलगेज से न चलने के कारण फसलों पर संकट के बादल मड़रा रहे हैं। एडीम प्रमिल कुमार का कहना है कि हाल ही हुर्ह सिंचाई बंधु की बैठक में किसान यूनियन के नेताओं ने भी यह समस्या उठाई थी। जिसके बाद काफी क्षेत्रों में फुलगेज से नहरें चलाकर समस्या का समाधान किया गया था। जहां पर अभी भी पानी की समस्या है उसे भी जल्द दूर किया जाएगा।
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सरावन क्षेत्र के हदरूख रजबहा में पानी न आने से सरावन सहित आसपास के करीब एक दर्जन गांवों की सैकड़ों एकड़ फसल पर संकट के बादल छाए हुए हैं। दो दिन पहले तक तेज धूप निकलने से पानी की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यदि समय से पानी नहीं मिला तो फसलें सूख जाएगी। एक ओर किसान अन्ना मवेशियों के कारण रातभर खेतों में जागकर रखवाली कर रहा है वहीं पानी की कमी उसकी फसल अच्छी होने की गारंटी भी नहीं दे रही है। बेबस किसान करें भी तो क्या करें।

सिरसाकलार क्षेत्र के तरसौर रजबहा में फुलगेज से पानी न आने के कारण गेहूं और लाही की फसल सूखने की कगार पर है। किसानों का कहना है कि पलेवा के समय भी पानी मिलने में काफी दिक्कत हुई थी। अब यदि समय पर पानी नहीं मिला तो खाद नहीं लग पाएगी जिससे उपज कम होने की पूरी आशंका है। करतलपुर आसपास भी पानी का संकट है। विभाग के अधिकारी भी निरीक्षण को नहीं आ रहे हैं। इससे भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है और रजबहा धीमा चल रहा है।
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सिरसाकलार के किसान किशनपाल का कहना है कि पानी तो मिला है लेकिन फुलगेज न होने के कारण ठीक से सिंचाई नहीं हो पा रही है। जिससे चिंता बढ़ गई है। सिरसाकलार के किसान सुशील के मुताबिक जहटोली में टेक (रुकावट) न होने से पानी नीचे जा रहा है। जिससे भी खेतों तक पानी पूरा नहीं पहुंच रहा है। बदनपुरा गांव के किसान राजेश कुमार ने बताया कि उनकी 20 बीघा गेहूं की फसल खड़ी है। जिसमें पहला पानी भी नहीं मिला है। गूलों (नालियां) में पानी नहीं है। सरावन के किसान संतराम कुशवाहा का कहना है कि गेहूं की बुआई किए हुए करीब एक माह बीत गया है, पर पानी का कुछ अता पता नहीं हैं। ऐसा ही रहा तो फसल खराब हो जाएगी।
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