उरई। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला दीवानी न्यायालय परिसर में हुआ।
इसमें 1,39,865 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें बैंकों के बकाया ऋण के 458 मामलों में बैंक एवं बकायेदारों के बीच 5,45,23,000 रुपये की धनराशि का समझौता कराया गया। श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस लिमिटेड द्वारा 11 मामलों में 1,07,803 रुपये धनराशि वसूल की गई। आपराधिक प्रकरणों में विभिन्न न्यायालयों द्वारा 2,80,910 रुपये बतौर जुर्माना धनराशि अभियुक्तों से राजकीय कोष में जमा कराई। लोक अदालत से आज एक लाख 50 हजार वादकारी लाभान्वित हुए।
लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज लल्लू सिंह ने किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व एडीजे महेंद्र कुमार रावत ने बताया कि जिला जज ने 15 मामलों का निस्तारण कर 2,29,64,765 रुपये धनराशि पक्षकारों को दिलाई।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार वशिष्ठ ने 52 मामलों में विपक्षी बीमा कंपनियों से पीड़ित को 3,35,57,973 रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाया। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह गौतम ने 26 मुकदमों का निस्तारण किया। अपर कुटुंब न्यायाधीश अमृता शुक्ला ने 61 मुकदमों का निस्तारण किया। उन्होंने भरण-पोषण के मामलों में 16,32,900 रुपये पीड़िताओं को दिलाएं। 10 जिला उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार ने 17 मुकदमों का निस्तारण करते हुए 16,56,565 रुपये दिलाए।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राजवर्धन गुप्ता ने तीन मामले निपटाए। एडीजे प्रथम अंचल लवानिया ने एक, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट शिवकुमार ने पांच, विशेष न्यायाधीश डकैती प्रमोद कुमार गुप्ता ने दो, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अवनीश कुमार ने 178, अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमर एवं अंजू राजपूत ने भी एक-एक मामला निपटाया। सीजेएम रेनू यादव समेत सभी न्यायिक मजिस्ट्रेटों ने 4,986 वादों का निस्तारण करते हुए 2,78,410 रुपये अर्थदंड जमा कराया।
सिविल जज गजेंद्र सिंह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो मोहम्मद आजाद, राजीव सरन, अर्पित सिंह, अनुकीर्ति संत, प्रियंका सरन, उमैमा शहनवाज, मोहित निर्वाल, वंदना, इशिता सिंह व चंद्रभान ने भी सहभागिता की। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट, उप जिला मजिस्ट्रेट, नगर मजिस्ट्रेट और तहसीलदार न्यायालयों द्वारा राजस्व संहिता और फौजदारी के कुल 1,785 मामलों का निस्तारण किया गया।
सिम्हारा गांव के अनिल कुमार ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 2016 में 29 हजार बैंक से लोन लिया था। उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपना मामला लोक अदालत में डाला। बैंक प्रबंधन और अधिकारियों की मौजूदगी में उनका मामला सात हजार रुपये में निपट गया।
गोहन निवासी नारायण विश्वकर्मा ने बताया कि उन्होंने इंडियन बैंक से 32 हजार रुपये वर्ष 2013 में लोन लिया था। बैंक लोन का वह 25 हजार रुपये पहले धीरे-धीरे दे चुके थे। बाकी सात हजार रुपये बकाया था। जो आज लोक अदालत के माध्यम से निपट गया। उन्होंने सात हजार रुपये जमा किए।