पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व क्षय दिवस पर जिला अस्पताल परिसर स्थित जिला क्षय रोग नियंत्रण केंद्र पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान क्षय रोग को 2025 तक समाप्त करने का संकल्प लिया गया। लोगों को टीबी के खिलाफ जागरूक करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अल्पना बरतारिया ने डॉ. रार्बट कॉच के चित्र पर माल्यार्पण कर की। इस दौरान सीएमओ ने बताया कि टीबी के खात्मे के लिए जितना इलाज जरूरी है, उसी तरह जागरुकता भी जरूरी है।
हमें 2025 तक जनपद को टीबी मुक्त बनाना है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुग्रीव बाबू ने बताया कि 24 मार्च को टीबी के जीवाणु की खोज की गई थी। इसमें नियमित दवा सेवन करने से रोग ठीक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि क्षय रोगियों का इलाज एमडीआर (मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंट) पद्धति से किया जा रहा है। इसकी जांच के लिए सीबीनाट मशीन स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि पंजीकृत प्राइवेट चिकित्सक से भी इलाज कराने वाले क्षय रोगियों को पोषण योजना के तहत पांच सौ रुपये प्रतिमाह मदद दी जाती है।
जिला कार्यक्रम समन्वयक नुरुल हुदा ने बताया कि वर्ष 2005 में रिवाइव नेशनल ट्यूबर क्लोसिस प्रोग्राम (आरएनटीसीपी) कार्यक्रम शुरू हुआ था। तबसे जनपद में आठ टीबी यूनिट व 19 माइक्रोस्कोपिक सेंटर कार्यरत है।
इसके अंतर्गत 731 डाट्स यानी डायरेक्टली ऑब्जव्रड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स सेंटर खोले गए है। संचालन एसटीएस राजीव कुमार उपाध्याय ने किया। इस दौरान प्रवीण कुमार, राममोहन चतुर्वेदी, आलोक मिश्रा, संजय अग्रवाल, शहनवाज आदि मौजूद रहे।