उरई। पिछले तीन महीनों से जिले में प्लाटों की खरीद बिक्री पर लगी रोक को महानिरीक्षक निबंधन ने हटा दिया है। महानिरीक्षक ने जिलाधिकारी के उस निर्देश को निरस्त कर दिया है। जिसमें उन्होंने प्लाट खरीद के लिए विकास प्राधिकरण की एनओसी को अनिवार्य कर दिया था। रोक हटते ही सोमवार से जिले में प्लाटों की खरीद बिक्री शुरू हो गई। इससे उन खरीदारों के चेहरे खुशी से खिल उठे है, जिनकी प्लाट का सौदा होने के बाद भी रोक की वजह से रजिस्ट्री नहीं हो पा रही थी।
बता दें कि शहर में 2001 में उरई विकास प्राधिकरण (ओडीए) अस्तित्व में आया था। ओडीए के गठन के बाद से ही शहर के विकास की जिम्मेदारी ओडीए पर आ गई और सभी मकानों के नक्शे ओडीए के मानक के हिसाब से पास होने लगे। वर्ष 2001 से लेकर 2018 तक ओडीए ने प्लाट खरीद पर नक्शे पास कराने की शर्त नहीं रखी थी। यह शर्त मकान बनने की समय की है, लेकिन अचानक नवंबर माह में जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर ने जिले में सभी प्रकार के प्लाटों की खरीद बिक्री पर पूर्णतया रोक लगा दी थी।
रजिस्ट्रार को दिए लिखित निर्देश में उन्होंने जिले में बिना नक्शे पास कराए व ओडीए की बिना एनओसी के प्लाट खरीद बिक्री बंद कर दी। इसको लेकर कई अधिवक्ता व वेंडर हड़ताल पर चले गए और कई बार जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर व्यवहारिक समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। मामले को लेकर कई विक्रेता व क्रेताओं ने झांसी कमिश्नर के साथ महानिरीक्षक निबंधन मिनिस्ती एस से भी शिकायत की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए महानिरीक्षक निंबधन ने रोक को नियम विरुद्ध बताते हुए जिलाधिकारी के निर्देश को खारिज कर दिया और रोक को हटा दिया था। रोक हटते ही सोमवार को रजिस्ट्री कार्यालय में क्रेता व विक्रेताओं की भीड़ उमड़ पड़ी।