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Yaksh App: अपराधियों को किसी भी कोने से खोज निकालेगा 'यक्ष', आसान होगी अपराधी की कुंडली-गैंग नेटवर्क मैपिंग

Fri, 06 Feb 2026 02:46 PM IST
चमन शर्मा कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

एप में अपराधियों का डेटाबेस होगा। एक क्लिक पर अपराधी का नाम, पता, गैंग कनेक्शन, पिछले अपराध और वर्तमान लोकेशन की जानकारी मिल जाएगी। यदि कोई अपराधी अपने तय निवास स्थान से अचानक गायब होता है या अपनी लोकेशन बदलता है, तो संबंधित थाने और बीट सिपाही को तुरंत अलर्ट मिल जाता है।
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यक्ष एआई एप्लीकेशन - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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अपराध की दुनिया पर नकेल कसने के लिए पुलिस अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। 'यक्ष' नामक एक नया एआई-आधारित एप्लीकेशन लांच किया गया है, जो देश के किसी भी कोने से अपराधियों को ढूंढ़ निकालने में सक्षम है। एक फरवरी से इस प्रणाली के लिए जिले में पुलिस कर्मियों ने डेटा डिजिटाइजेशन का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है।

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'यक्ष' ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसकी एआई आधारित पहचान प्रणाली है। इसमें उन्नत फेशियल एवं वॉयस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यदि कोई अपराधी हुलिया बदलकर या फर्जी नाम से रह रहा है, तो पुलिस उसकी फोटो लेकर एप के जरिये उसका पूरा काला चिट्ठा तुरंत खोल सकती है।

बीट पुलिसिंग होगी और भी स्मार्ट
अब पुलिसकर्मियों को कागजी रजिस्टर लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी। बीट सिपाही सीधे अपराधी के घर जाकर 'यक्ष' एप पर उसका भौतिक सत्यापन करेंगे। सिपाही द्वारा अपडेट की गई जानकारी सीधे वरिष्ठ अधिकारियों के स्मार्ट डैशबोर्ड पर रिफ्लेक्ट होगी, जिससे निगरानी की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी। इसके लिए पुलिस अधीक्षक से लेकर बीट सिपाही तक की आईडी बनाई गई हैं।

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जियो टैगिंग का काम शुरू
डीजीपी के निर्देश के बाद पुलिस ने इस एप पर काम शुरू कर दिया है। पहली जिम्मेदारी बीट सिपाहियों की है। बीट सिपाहियों ने गली-मोहल्लों को जियो टैग करना शुरू कर दिया है। गली-मोहल्लों के बाद अपराधियों के घरों की टैगिंग की जाएगी। इधर, थाना प्रभारियों के स्तर से यक्ष एप पर सभी अपराधियों का डाटा फीड किया जा रहा है। फोटो आदि जुटाए जा रहे हैं।

इस तरह मिलेगा लाभ
  • एआई-आधारित पहचान : इसमें चेहरा और आवाज पहचानने की तकनीक शामिल है। अगर कोई अपराधी अपनी पहचान बदलकर घूम रहा है, तो पुलिस उसकी फोटो लेकर एप के जरिये उसका पुराना रिकॉर्ड तुरंत चेक कर सकती है।
  • अपराधी की कुंडली : एप में अपराधियों का डेटाबेस होगा। एक क्लिक पर अपराधी का नाम, पता, गैंग कनेक्शन, पिछले अपराध और वर्तमान लोकेशन की जानकारी मिल जाएगी।
  • रियल टाइम अलर्ट : यदि कोई अपराधी अपने तय निवास स्थान से अचानक गायब होता है या अपनी लोकेशन बदलता है, तो संबंधित थाने और बीट सिपाही को तुरंत अलर्ट मिल जाता है।
  • कलर कोडिंग और क्राइम स्कोर : एआई अपराधियों के रिकॉर्ड और उनके अपराध की गंभीरता के आधार पर उन्हें 'कलर कोड' (जैसे लाल, पीला) और एक क्राइम स्कोर देता है। इससे पुलिस को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस अपराधी पर सबसे ज्यादा निगरानी रखनी है।
  • गैंग नेटवर्क मैपिंग : यह एप अपराधियों के आपसी संबंधों का विश्लेषण कर उनके गैंग का पूरा ढांचा (लीडर, सदस्य, मददगार) डिजिटल रूप में पुलिस के सामने पेश करता है।
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एप्लीकेशन के पांच मॉड्यूल
यक्ष एप्लीकेशन पांच मॉड्यूल के साथ लांच हुआ है। इसमें अपराधी प्रोफाइलिंग मॉड्यूल, फिंगरप्रिंट और बायोमीट्रिक एकीकरण, रीयल-टाइम डेटा एक्सेस (ऑन फील्ड वाहनों के पंजीकरण, पुराने वारंट, गुमशुदा व्यक्ति की जानकारी), हॉट स्पॉट मैपिंग और एनालिटिक्स व इंटर-एजेंसी डेटा शेयरिंग (विभिन्न राज्यों व एजेंसियों से डेटा साझा)

इन्होंने डाउनलोड किया यक्ष एप
अब तक जिले में 774 पुलिस कर्मी इस एप को डाउनलोड कर चुके हैं। इनमें एसपी, एएसपी, तीन डिप्टी एसपी के अलावा 11 थाना प्रभारी, 156 चौकी इंचार्ज, 16 कंप्यूटर ऑपरेटर, 586 बीट सिपाही शामिल हैं।
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