मेला श्रीदाऊजी महाराज के सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों में मातृशक्ति की भूमिका लगातार बढ़ रही है। मेले के कुल 70 छोटे-बड़े आयोजनों में से इस वर्ष सात महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की कमान महिला संयोजकों को सौंपी गई है। पिछले वर्ष के मेले में यह आंकड़ा महज पांच तक सीमित था।
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से कार्यक्रमों के आवंटन में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए कोई स्पष्ट या पूर्व-निर्धारित रणनीति नहीं बनाई गई है। इसके बावजूद महिलाएं अपनी संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक सक्रियता के दम पर मंच संचालन व संयोजन में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
विदित रहे कि ऐतिहासिक रूप से मेले में महिलाओं की भूमिका केवल महिला केंद्रित कार्यक्रमों जैसे कवयित्री सम्मेलन, महिला कबड्डी या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सम्मेलनों तक ही सीमित मानी जाती थी। मुख्यधारा के बड़े धार्मिक, ऐतिहासिक और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों के संयोजन का दायित्व प्रायः पुरुषों के पास ही रहता आया है।
इस वर्ष महिला संयोजकों ने न केवल परंपरागत महिला मंचों को गरिमा के साथ संभाला, बल्कि ब्रज संस्कृति के शीर्ष आयोजन महारास, हाथरस का इतिहास, युवा सम्मेलन और मेरी माटी-मेरा देश जैसे कार्यक्रमों की पूरी बागडोर भी अपने हाथों में ली है। महिला संयोजकों का यह बढ़ता प्रभाव शहर की समाजसेवी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरा है।
इस वर्ष इन आयोजनों की कमान संभाल रहीं महिलाएं
-महारास : विदुषी पांडेय
-हाथरस का इतिहास : मनु दीक्षित
-युवा सम्मेलन : श्रुति मिश्र
-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ : शालिनी पाठक
-कवयित्री सम्मेलन : मीरा दीक्षित
-महिला कबड्डी : रितु गौतम
-मेरी माटी-मेरा देश : रूपम कुशवाहा