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Hathras News: बंदरों से कौन दिलाएगा निजात, विभागों में खींचतान

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शहर के गोशाला रोड पर बंदरों का झुंड। संवाद 
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जनपद में बंदरों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। औसतन रोजाना 150 लोग इनका शिकार बन रहे हैं। शासन स्तर से बेहद गंभीर परिस्थितियों में बंदरों को मारने के आदेश जारी होने के बाद भी जिम्मेदार विभागों के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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इस मुद्दे पर वन विभाग और नगर निकायों के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान जारी है। नगर पालिका हाथरस के अधिशासी अधिकारी बंदरों को पकड़ने या मारने की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं और इसे वन विभाग का कार्य बता रहे हैं। इधर, वन विभाग का कहना है कि बंदर वन्य जीव की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए यह कार्य नगर निकायों का है। विभाग की ओर से केवल तकनीकी सहयोग देने की बात कही जा रही है।

इधर, लोग बंदरों के डर से घरों में कैद होकर रह गए हैं। परिजन बच्चों और बुजुर्गों को बाहर भेजने में डरते हैं। कई मोहल्लों में लोगों ने अपने घरों की छतों और खिड़कियों पर लोहे के जाल लगवा दिए हैं, तो कहीं बिजली के झटके वाले तार लगाए गए हैं।
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- जनता को बंदरों से राहत दिलाने के लिए शासन से आदेश आया है। बंदर हमें पकड़ने हैं या नहीं, इसके बारे में विस्तृत जानकारी की जाएगी। नगर पालिका व वन विभाग का इसमें किस तरह से सामंजस्य होगा, यह भी देखा जाएगा। इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।

रोहित सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका।





हमें शासन से जो आदेश मिला है, उसमें स्पष्ट है कि हमें नगर निकायों को तकनीकी मदद उपलब्ध करानी है। इसमें बंदर पकड़ने वाली संस्थाओं से वन विभाग संपर्क करा सकता है। क्योंकि बंदर वन्यजीव नहीं है, इसलिए इन्हें पकड़ने में विभाग की भूमिका नहीं है।
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राकेश चंद्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी।
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