संवाद न्यूज एजेंसी, हसायन।
भगवान की स्तुति करने से मन को शांति मिलती है। भगवान का जप करने से परिवार में हमेशा शांति का वातावरण रहता है। यह बातें गांव बनवारीपुर में स्थापित श्रीबांकेबिहारी जी महाराज के मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य देवकीनंदन ठाकुर जी ने कहीं।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि मन से याद करने पर भगवान स्वयं ही भक्त को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। आचार्यश्री ने गोवर्धन पूजा की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ऊंचा पद व कद पाने पर कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है।
आचार्य ने कहा कि जब नंदगांव के बाशिंदे इंद्र की पूजा करते तो भगवान श्रीकृष्ण ने नंदबाबा सहित सभी ग्वालों को इंद्र की पूजा करने से रोकते हुए गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा। भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर जब नंद गांव के ग्रामीणों ने गोवर्धन की पूजा की तो अहंकार के वशीभूत होकर इंद्र ने अपना क्रोध जाहिर करते हुए बृज क्षेत्र में भयंकर बारिश शुरू कर दी तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गिरिराज पर्वत को धारण कर इंद्र के कोप से ग्वाल वालों की रक्षा की और इंद्र के अभिमान का मर्दन किया।
इस मौके पर सपा के पूर्व जिला महासचिव महेंद्र सिंह सोलंकी ने आचार्य देवकीनंदन ठाकुर का चांदी का मुकुट पहनाकर व अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया। आयोजक अवधेश जादौन ने गोवर्धन महाराज के स्वरूप का विधि-विधान से रोली-चावल से तिलक किया और भगवान को भोग लगाया।
इस मौके पर पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान, पप्पू सिंह पूर्व एमएलसी, पूर्व विधायक सुरेश प्रताप गांधी, रामबेटी जादौन, अवधेश जादौन, अरुण कुमार जादौन, बसंत कुमार जादौन, सुनील कुमार जादौन, पूर्व ब्लॉक प्रमुख डंबर सिंह, सुशील जादौन आदि मौजूद थे।