शिक्षा सत्र 2020-21 में शासन से बेसिक विभाग के विद्यार्थियों को यूनिफाॅर्म उपलब्ध कराने के लिए 644289250 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई थी। उस समय विद्यालय प्रबंध समिति के बैंक खातों में धनराशि हस्तांतरित की जाती थी। नियमानुसार विद्यालय प्रबंध समिति चार लोगों की क्रय समिति का गठन करती थी। यह समिति यूनिफाॅर्म के लिए कपड़ा खरीदती थी और यूनिफाॅर्म सिलवाकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराती थी। तत्कालीन बीएसए पर आरोप है कि उन्होंने निजी फायदे के लिए नियमों के दरकिनार कर अलीगढ़ की फर्म के साथ मिलकर पूरा खेल किया था। इसमें सहपऊ के एक शिक्षक ने अहम भूमिका निभाई थी। विद्यालय प्रबंध समिति ने चेक बीआरसी पर जमा कराए थे। बताया जा रहा है कि फर्म ने बिल तक उपलब्ध नहीं कराए हैं। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि मामले को तूल पकड़ता देख बीएसए कार्यालय के कर्मचारी आनन-फानन अब बिलों की व्यवस्था करने में जुटे हैं।
तत्कालीन बीएसए मनोज मिश्रा पर अनियमितताओं के आरोपों की खुली जांच चल रही है। यूनिफार्म वितरण में गड़बड़ी भी उनमें से एक है। इसे लेकर टीम बीएसए दफ्तर भी गई थी।- आलोक शर्मा, एसएसपी विजिलेंस, आगरा