कृषि सेवा केंद्र संभालतीं वर्षा। स्रोत : स्वयं
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जनपद के गांव धतरोई की वर्षा ग्रामीण महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। करीब चार वर्ष पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाने वाली वर्षा अब कृषि सखी के रूप में किसानों को फसलों की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए मार्गदर्शन दे रही हैं।
वर्षा ने न केवल अपना कृषि सेवा केंद्र स्थापित किया है, बल्कि क्षेत्र के किसानों को कीटनाशकों, खाद और अन्य उर्वरकों के सही उपयोग के बारे में भी जागरूक कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन से किसान फसलों को बीमारियों और कीटों से बचाने के उपाय सीख रहे हैं। वर्षा का कहना है कि उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने की शुरुआत की थी।
आज वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वर्षा किसानों को यह भी समझाती हैं कि कीटनाशकों का संतुलित और सही समय पर प्रयोग ही फसल को सुरक्षित रख सकता है। इसके साथ ही वह जैविक विकल्पों के उपयोग की भी सलाह देती हैं, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन बेहतर हो सके।
स्थानीय किसानों का कहना है कि वर्षा की सलाह से उन्हें फसल के बचाव के बेहतर तरीके समझ में आए हैं, जिससे उत्पादन में सुधार हुआ है। इस तरह वर्षा न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में कृषि जागरूकता फैलाकर अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। स्वत: रोजगार के उपायुक्त प्रेमनाथ यादव ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार उन्हें समूह आदि से जोड़ा जा रहा है।