संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
बैंगलोर में ट्रैफिक जाम में फंसे एक डॉक्टर ने सेवाभाव की ऐसी मिसाल पेश की है कि जो भी उनके बारे में सुन रहा है तारीफ ही कर रहा है। दरअसल, एक डॉक्टर ने मरीज की जान बचाने के लिए तीन किमी की दौड़ लगा दी और समय पर अस्पताल पहुंचकर मरीज की सफल सर्जरी तक की।
ऐसे ही कुछ चिकित्सकों ने बातचीत के दौरान अपनी ड्यूटी से जुड़े अनुभवों को साझा किया। इस चिकित्सकों का कहना है कि एक वो भी दौर था, जब वह अंधेरी रात में टालटेन जलाकर लोगों का उपचार किया करते थे।
- मेरी सबसे पहले पोस्टिंग आजमगढ़ में हुई थी। देहात के एक अस्पताल में मुझे तैनाती मिले। जहां पर बारिश का पानी चारों तरफ भरा रहता था। उस वक्त बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी तो हम लोग रात को लालटेन में मरीजों को देखकर उपचार दिया करते थे। कभी-कभी तो पानी से होकर ही रात को गुजर कर गांव में मरीजों को देखने जाना पड़ता था, लेकिन हमें यह सब करना अच्छा लगाता था। - डॉ. आरपी सिंह, पूर्व सीएमओ।
- डॉक्टर होने के नाते हमारा फर्ज है कि हम सबसे पहले मरीज को देखें, बैंगलोर में डॉक्टर द्वारा किया गया कार्य सराहनीय है। सभी डॉक्टर को अपने कर्म व फर्ज को ध्यान में रखते हुए ऐसे की कार्य करते रहना चाहिए। ऐसे डॉक्टर्स ही तो हमारे आदर्श हैं। डॉक्टर होने के नाते मेरा पहला धर्म मरीज को उपचार देना है। - डॉ गोपाल वर्मा, हड्डी रोग विशेषज्ञ।
- जब हम मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे उस वक्त हमारे सामने कई बार ऐसा मौका आया कि हमारी शिफ्ट समाप्त हो गई और हम घर के लिए निकलने ही वाले हैं लेकिन उसी वक्त अगर इमरजेंसी वाला कोई मरीज आता था तो हम पहले उसे देखते थे, उसी के बाद घर जाते थे। यहां पर भी ऐसा कई बार हुआ है। - डॉ. संतोष गुप्ता।
- डॉक्टर होने के नाते मरीज को उपचार देना हमारा फर्ज है। ईश्वर के बाद लोग डॉक्टर को मानते हैं। लोग तभी तो डॉक्टर को मानते हैं, उन्हें भरोसा होता है कि डॉक्टर उनके मरीज को ठीक कर देंगे। इसलिए सभी डॉक्टर्स को अपने फर्म व कर्म से हटना नहीं चाहिए। बैंगलोर के चिकित्सक ने एक मिसाल पेश की है। - डॉ. मंजू रानी, स्त्री रोग विशेषज्ञ।