मिलावट के इस दौर में अब खाना पीना भी सेहत के लिए हानिकारक हो गया है। दूध दही से लेकर पनीर तक कुछ भी सुरक्षित नहीं है। जिले से लिए गए सैंपलों की लखनऊ प्रयोगशाला से जो रिपोर्ट प्राप्त हुई है, उसमें दूध और पनीर के आधा दर्जन से अधिक नमूने फेल आए हैं।
गुणवत्ता के नाम पर यह मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह सैंपल अक्तूबर माह में लिए गए थे। दूध और दूध से तैयार होने वाली खाद्य सामग्री में सबसे ज्यादा खेल हो रहा है। दूध की पहले क्रीम निकाली जा रही है और फिर उसमें पानी मिलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य के लिए लाभदायक दूध के आवश्यक तत्व तो पहले ही निकाल लिए जा रहे हैं। प्रयोगशाल से जारी रिपोर्ट से मालूम पड़ा है कि दूध में फैट और एसएनएफ (चिकनाई) का जो निर्धारित मानक है, वह आ ही नहीं रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक दूध के जो सैंपल फेल आए हैं, उनमें निर्धारित एसएनएफ 8.5 फीसदी होनी चाहिए, जबकि फेल हुए सैंपल में यह मात्रा सिर्फ 7 के आसपास पाई गई है। अब जब दूध ही दुरुस्त नहीं है तो पनीर भला कैसे हो सकता है।
पनीर में भी फैट काफी कम पाई गई है। पनीर में 50 फीसदी की जगह सिर्फ 47.6 फीसदी फैट पाया गया है। प्रयोगशाला ने सात नमूनों की जो रिपोर्ट जारी की है, वह सब फेल आए हैं। अभिहित अधिकारी डॉ. श्वेता सैनी ने बताया कि सभी के खिलाफ नोटिस जारी करने और न्यायालय में वाद दायर करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
- नया गंज पर अखिलेश पुत्र बिहारीलाल का पनीर का नमूना फेल
- सलेमपुर सादाबाद पर मनवीर सिंह पुत्र शिव सिंह का दूध का नमूना फेल
- मढ़ाका सहपऊ पर शीलेश पुत्र बलवीर का दूध का नमूना फैल
- बढ़ार सादाबाद पर हरिओम सिंह पुत्र भगवान सिंह का दूध का नमूना फेल
- सलेमपुर सादाबाद पर बबलू पुत्र भगवान सिंह का दूध का नमूना फेल
- नगला हीरा सिंह कोटा मुरसान से इंद्र सिंह पुत्र थान सिंह का दूध का नमूना फेल