जिले में करीब दो हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति खतरे में पड़ सकती है। शासन स्तर पर कराई गई जांच में करीब दो हजार विद्यार्थियों का डाटा संदेहास्पद पाया गया है। समाज कल्याण विभाग ने यह डाटा संबंधित विद्यालयों को संशोधित संशोधित कराने के लिए भेजा था। इसे संशोधित करने के लिए 20 फरवरी तक की समय सीमा दी गई थी, जोकि बीत चुकी है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जिन्होंने अभी तक यह डाटा संशोधित नहीं किया है। कहीं स्कूलों की लापरवाही से विद्यार्थियों का नुकसान नहीं हो जाए, इसलिए अब समाज कल्याण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी संबंधित स्कूल वालों को फोन करके डाटा संशोधन के लिए बुलवा रहे हैं।
विभागीय कोशिश से अब तक ज्यादातर स्कूल-कॉलेजों का संदेहास्पद डाटा संशोधित हो चुका है। कुछ का रह गया है तो उन्हें भी बुलाकर इसे संशोधित कराया जा जा रहा है। समाज कल्याण विभाग का दावा है कि कोशिश की जा रही है कि शत-प्रतिशत विद्यार्थियों का संदेहास्पद डाटा दुरुस्त हो जाए, जिससे उन्हें छात्रवृत्ति का नुकसान नहीं हो पाए, फिर भी अगर किसी विद्यार्थी को त्रुटिपूर्ण डाटा की वजह से वजीफा नहीं मिल पाता है तो इसके लिए संबंधित स्कूल-कॉलेज जिम्मेदार होंगे। अभी तक विभाग 9,10,11 व 12वीं कक्षाओं का संदेहास्पद डाटा संशोधित कराया जा रहा है। बेशक इसकी समय सीमा खत्म हो चुकी है, लेकिन विद्यार्थियों का नुकसान बचाने के लिए विभाग इसे अभी तक संशोधित करा रहा है। इसके बाद दशमोत्तर कक्षाओं का संदेहास्पद डाटा संशोधित कराया जाएगा। इसके लिए शासन ने पांच मार्च तक की समय सीमा तय की है।
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सभी स्कूल-कॉलेज वालों को त्रुटिपूर्ण डाटा भिजवा दिया गया है और उनसे जल्द से जल्द इसे दुरुस्त कराके भिजवाने को कहा गया है, ताकि सभी विद्यार्थियों को समय से छात्रवृत्ति मिल सके।
-एसपी सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी हाथरस