जिले में बुखार का कहर शुरू हो गया है। गांव-गांव फैल रहे बुखार ने अब जान लेना भी शुरू कर दिया है। पिछले दो दिन में एक वृद्ध और चार बच्चों को बुखार ने निगल लिया। रविवार को दो मासूम बच्चों और एक वृद्ध की मौत हो गई। मृतकाें के यहां करुण क्रंदन मचा रहा। गांव में मातम छाया रहा।
बदल रहा मौसम बीमारियों की सौगात दे रहा है। वायरल फीवर, डायरिया जैसे रोग लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। बच्चे और वृद्ध लगातार इन रोगों की चपेट में आ रहे हैं। परिवारों में बुखार से कोहराम मचा हुआ है। इधर, बुखार के प्रकोप के बाद भी स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी बेसुध बने हुए हैं। बुखार से हो रहीं मौतों के बाद भी कोई भी पर्याप्त इंतजाम महकमा अभी तक नहीं कर सका है।
अस्पतालों में न दवाएं हैं और न पर्याप्त चिकित्सक, ऐसे में महकमे पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। चंदपा के गांव परसारा निवासी महेंद्र उपाध्याय के इकलौते छह साल के मासूम बेटे अभि को पिछले एक हफ्ते से बुखार से था। महेंद्र ने बेटे को हाथरस में भी चिकित्सकों को दिखाया, यहां भी हालत न सुधरी तो उसे अलीगढ़ ले जाया गया। अलीगढ़ के एक निजी हॉस्पिटल में उसे वेंटिलेटर पर रखा गया।
रविवार को उसकी मौत हो गई। इसके अलावा हसायन के मोहल्ला शीशग्राम में बबलू के पांच साल के मासूम बेटे धीरज की मौत भी बुखार से हो गई। धीरज को पिछले पांच दिनों से बुखार था। परिजनों ने उसका उपचार कस्बे के ही एक चिकित्सक पर कराया। परिजनों का आरोप है कि इस चिकित्सक के गलत इलाज की वजह से ही धीरज की मौत हुई है। चिकित्सक शराब पीकर इलाज करता है। हसायन के गांव बदनपुर में भी हरी सिंह पुत्र लाल सिंह उम्र 50 साल की मौत भी बुखार से हो गई। हरी सिह को पिछले दस दिनों से बुखार था। हरी सिंह को हाथरस से अलीगढ़ और अलीगढ़ से दिल्ली के लिए उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रविवार को उनकी मौत हो गई।