मकर संक्रांति पर्व ने इस बार बाजारों में रौनक ला दी है। करीब दो करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। शहर से लेकर कस्बों और ग्रामीण बाजारों तक खरीदारी का उत्साह रहा।
विशेष रूप से तिल और गुड़ से बने व्यंजनों की मांग रही। गजक, रेवड़ी, तिल के लड्डू और अन्य पारंपरिक मिठाइयों का जनपद में लगभग 80 लाख रुपये का कारोबार हुआ। गजक की दुकानों पर पर्व से एक-दो दिन पहले से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। कंबल, रजाई, शॉल और अन्य ऊनी वस्त्रों की भी बिक्री हुई। व्यापारियों के अनुसार कंबल आदि का करीब 70 लाख रुपये का कारोबार हुआ। दान देने के लिए लोगों ने बड़ी संख्या में कंबल खरीदे। मंदिर पर देवी मां को अर्पित करने के अलावा परिवार और रिश्तेदारों के बीच मेल-मिलाप के चलते सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसमें लगभग 20 लाख रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है। मोजे, टोपे, स्वेटर और अन्य ऊनी वस्त्रों का करीब 30 लाख रुपये का कारोबार हुआ। गजक विक्रेता नितिन वार्ष्णेय ने बताया कि मकर संक्रांति के चलते बाजारों में कई दिनों बाद अच्छी चहल-पहल देखने को मिली। कॉस्मेटिक्स विक्रेता शरद अग्रवाल ने बताया कि धूप निकलने के कारण मकर संक्रांति का पर्व कारोबार की दृष्टि से काफी अच्छा रहा है।