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Hathras News: हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबला, यह रही है भाजपा की जिताऊ सीट

Tue, 25 Apr 2023 12:08 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष की सीट इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यदि इस सीट का इतिहास देखें तो यह भाजपा की जिताऊ सीट रही है। वर्ष 2006 के निकाय चुनाव की बात छोड़ दें तो भाजपा इस सीट पर जीतती चली आई है।
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श्वेता दिवाकर,भाजपा प्रत्याशी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नगर निकाय चुनाव में हाथरस नगर पालिका अध्यक्ष पद पर भाजपा, सपा और बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला होने से आसार हैंं। भाजपा जहां अपनी इस जिताऊ सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है तो वहीं बसपा की कोशिश है कि इस चुनाव को जीतकर वह हाथरस क्षेत्र में अपनी खोई हुई चुनावी जमीन वापस हासिल कर सके। सपा इस सीट पर पहली बार जीतने के लिए आतुर है। कांग्रेस भी मुख्य मुकाबले में आने की कोशिश कर रही है। सभी दल स्थानीय मुद्दे उठा रहे हैं और जीतने के लिए जातीय समीकरणों का भी सहारा ले रहे हैं।

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हाथरस नगर पालिकाध्यक्ष की सीट इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यदि इस सीट का इतिहास देखें तो यह भाजपा की जिताऊ सीट रही है। वर्ष 2006 के निकाय चुनाव की बात छोड़ दें तो भाजपा इस सीट पर जीतती चली आई है। वर्ष 2006 में जरूर बसपा के इस सीट पर परचम लहराया था और अगम प्रिय सत्संगी ने चुनाव जीता था। इससे पहले भाजपा के रमेश चंद आर्य और वैद्य रेवती प्रसाद माहौर चेयरमैन निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2012 में भाजपा की डौली माहौर ने चुनाव जीता था। तदुपरांत वर्ष 2017 में भाजपा के आशीष शर्मा इस सीट पर अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।

ऐसे में भाजपा को फिर उम्मीद है कि वह इस सीट पर आसानी से जीत हासिल कर लेगी। पिछले कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का तो भाजपा हवाला देगी ही। साथ ही मोदी और योगी के नाम पर उसे वोट मिलने की आस है। मजबूत संगठन भाजपा प्रत्याशी के लिए काफी फायदेमंद हैं। वैसे भी पार्टी ने पूर्व सांसद राजेश दिवाकर की पत्नी श्वेता दिवाकर के रूप में एक मजबूत उम्मीदवार उतारा है। बात यदि बसपा की करें तो बसपा इस सीट पर जीतकर अपनी खोई जमीन हासिल करने की कोशिश में है। पूर्व बसपा का हाथरस क्षेत्र में काफी अच्छा जनाधार रहा है।
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वर्ष 2017 में भी भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा का मुकाबला बसपा प्रत्याशी रितु उपाध्याय से हुआ था। रितु इस मुकाबले में दूसरे स्थान पर रही थी। बसपा ने इस सीट पर इस बार प्रमोद संजय को चुनाव मैदान में उतारा है। वह नगर निकाय चुनाव की राजनीति में नए हैं लेकिन पार्टी के परंपरागत वोटरों के अलावा मुस्लिम व पिछड़े वर्ग के वोटरों से पार्टी को खासी उम्मीद है। पार्टी को यह भी आस है कि इस चुनाव में फिर उसका सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला चलेगा और उसे जीत हासिल हो जाएगा। बात यदि सपा की करें तो सपा ने इस बार लल्लन बाबू को चुनाव मैदान में उतारा है।

लल्लनबाबू पूर्व में भी नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ चुके हैं और काफी बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2006 के चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2012 के चुनाव में उनकी पत्नी दूसरे स्थान पर रही थी। सपा आस है कि लल्लन बाबू के व्यक्तिगत प्रभाव का लाभ तो उसे मिलेगा ही, साथ ही भाजपा विरोधी वोट उसे मिलेगा और वह पहली बार इस सीट पर जीत हासिल कर सकेगी। बात यदि कांग्रेस की करें तो जब से जनता द्वारा इस सीट पर चुनाव होने लगा है, तब से कांग्रेस आज तक यह चुनाव नहीं जीत पाई है। कांग्रेस ने सीमा कुमारी को टिकट दिया है। यह लोगों के लिए नया नाम है। पार्टी मुख्य मुकाबले में आने की कोशिश कर रही है।

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