संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
सीएचसी में ट्रॉमा सेंटर का भवन सात साल पहले बनकर तैयार हो चुका है लेकिन चिकित्सकों की कमी से यह अभी तक चालू नहीं हो सका है। इसके चलते प्रतिदिन दुर्घटना में घायल मरीजों को रेफर किया जाता है। कई बार रास्ते में खून ज्यादा बहने की वजह से मरीज की मौत हो जाती है। विधायक का कहना है कि प्रदेश में चिकित्सकों की कमी के चलते यह चालू नहीं हो पा रहा है।
बता दें कि सपा सरकार में दुर्घटनाओं में घायलों को इलाज देने के उद्देश्य से ट्रॉमा सेंटर का भवन बनवाया गया। इसमें ऑपरेशन थियेटर, एक्स-रे रूम, अल्ट्रासाउंड कक्ष से लेकर हर तरह का निर्माण किया गया। ट्रॉमा सेंटर में एक सिविल सर्जन, एक हड्डी सर्जन के अतिरिक्त महिला चिकित्सक, एमडी रेडियोलॉजी, ओटी टेकनीशियन समेत नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की जानी है।
इसके अतिरिक्त कई उपकरणों की आवश्यकता है। अभी सिर्फ एक हड्डी सर्जन की नियुक्ति कर दी गई है लेकिन एक्स-रे मशीन, ओटी व उपकरण न होने से घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर कर दिया जाता है। ट्रॉमा सेंटर अलीगढ़ एनएच हाईवे, कासगंज हाईवे, एटा रोड, हाथरस रोड के मुहाने पर बना है। चारों मार्गों पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
लेकिन ट्रॉमा सेंटर के चालू न होने के कारण अस्सी फीसदी घायल रेफर कर दिए जाते हैं। समय से इलाज न मिलने के कारण इनमें से अधिकतर की मौत हो जाती है। इस संदर्भ में विधायक वीरेंद्र सिंह राना का कहना है कि पूरे प्रदेश में चिकित्सकों की कमी के कारण ट्रॉमा सेंटर चालू नहीं पा रहे हैं। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में हैं। वे स्वयं इसे चालू करने की योजना पर काम कर रहे हैं।