गौरव भारद्वाज, हाथरस।
ब्रज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज की शुरुआत को पांच दिन बीत चुके हैं। दो साल बाद आयोजित हो रहे इस मेले में रोजाना भीड़ भी उमड़ रही है। महिला बाजार सजा हुआ है। तरह-तरह के झूले मेले में लगे हैं।
खेल तमाशे से लेकर खान-पान तक की दुकानें व स्टॉल मेले में लगे हैं। मेले में रोजाना शहर व देहात के लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मेले में दूर-दराज से दुकानदार आए हैं। हालांकि पांच दिन बाद भी दुकानदार मेले में हुई कमाई से निराश हैं। उनका कहना है कि भीड़ तो आ रही है, लेकिन खरीदारी नहीं कर रही। हालांकि झूले व खेल तमाशों वालों के यहां भीड़ देखने को मिल रही है। संवाद
महंगा उठा ठेका, फिर भी परिसर नहीं है खाली
मेले का ठेका इस बार एक करोड़ 31 लाख रुपये में उठा। ठेका महंगा होने के बावजूद मेला परिसर खाली नहीं है। तरह-तरह के झूले, खेल-तमाशे, सर्कस, मौत का कुआं, भूत बंगला और वैरायटी शो मेले में लगे हैं। इसमें ब्रेक डांस, टोरी-टोरा, चरख, नाव, बच्चों की ट्रेन, ड्रेगन, रेंजर झूला मेले, वाटर पार्क आकर्षण का केंद्र हैं।
छोटे झूलों में बच्चे झूल रहे हैं तो युवा बड़े झूलों का लुत्फ उठा रहे हैं। लोग निशानेबाजी का भी लुत्फ उठा रहे हैं। शाम होने के बाद वैरायटी शो के बाहर युवाओं की भीड़ देखी जा सकती है। महिला बाजार भी लगा है। खाने-पीने की दुकानें सजी हैं। यहां क्राकरी से लेकर सौंदर्य प्रसाधन, गृह उपयोग की वस्तुएं, खेल खिलौनों की दुकानें भी सजी हैं। मेले में कई सरकारी विभागों के स्टॉल भी लगे हैं। इन पर सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
महिला बाजार में कुछ दुकानों पर भीड़ तो कुछ पर सन्नाटा
मेले में लगे महिला बाजार में सौंदर्य प्रसाधन से लेकर घरेलू उपयोग की वस्तुएं बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसमें क्राकरी, लकड़ी से बने घरेलू आयटम, टेडी बियर और खिलौनों का बाजार सजा है। यहां कंगन, चूड़ी की दुकानें भी सजी हैं तो कुछ दुकानों पर पांच रुपये से लेकर 20 रुपये तक का प्रति सामान उपलब्ध है। यह दुकानें महिलाओं को ज्यादा लुभा रही हैं। ढोलक, ढपली और मजीरा की दुकानें भी लगी हैं। कुछ दुकानदार लकड़ी के फिजियोथैरेपी के यंत्र भी बेचने के लिए लाए हैं।
जो गिलास का सेट मैने तीन साल पहले 180 रुपये में खरीदा था, वह इस बार 250 रुपये का है। फिर भी मेले में आई हूं और आयटम अच्छा है तो इसे ले जा रही हूं।
-चांदनी, ग्राहक
हलवा पराठा मेले का यह काफी प्रसिद्ध आयटम है। पिछली बार यह 120 रुपये प्रति किलो बिका था। इस बार रेट बढ़ गए हैं। कीमत 140 रुपये किलो है।
-फैजान, हलवा-पराठा विक्रेता
कंगन, चूड़ी की दुकानों पर लग रही महिलाएं व युवतियों की भीड़
मैने 30 रुपये में 12 कंगन खरीदे हैं। ज्यादा महंगा नहीं है। मेरे साथ मेरी सहेली रचना और बहन शिवानी भी आई हैं। हम लोग खरीदारी के लिए मेले में आए हैं।
-अंशिका, ग्राहक
इस बार मेले में जगह और बिजली मंहगी है। वैसे उसने इस बार पहली बार ही दुकान लगाई है। बिक्री इस बार कम है, फिर भी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में स्थिति सुधरेगी।
-अमित, दुकानदार
मेले में निशाना लगाना हुआ महंगा
मेला श्रीदाऊजी महाराज में निशाना लगाना मंहगा हो गया है। इटावा के महेश कई साल बाद मेले में अपना स्टॉल लगा रहे हैं। उनका कहना है पिछली बार 20 रुपये के दस फायर के रेट थे, लेकिन इस बार 40 रुपये के 10 फायर हैं। महेश का यह कहना था कि निशानेबाजी का हुनर कम लोग दिखा रहे हैं।
चरख झूले पर सबसे ज्यादा भीड़
झूलों पर चरख और ट्रेन पर सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा सकती है। चरख झूलने आए गौरव का कहना था कि झूला झूलने का आनंद ही अलग है। जब ऊंचाई से झूला नीचे आते हैं, तो एक अलग ही तरह की अनुभूति होती है। वैसे इधर, झूला संचालक भूरा का कहना है कि जिस हिसाब से भीड़ मेले में आती है, उस हिसाब से भीड़ नहीं आ रही।
सर्कस की ओर अभी लोगों का रुझान नहीं
हालांकि मेले में सर्कस भी लगा है, लेकिन अभी सर्कस में भीड़ नहीं उमड़ रही। सर्कस संचालक रहीश का कहना है अभी सर्कस में भीड़ कम आ रही है। हो सकता है कि इस बार घाटा झेलना पड़े। वैसे भी जब से जानवरों को सर्कस से प्रतिबंधित कर दिया गया है, तब से सर्कस देखने वालों की संख्या में काफी कमी आ गई है।
चुस्की अभी बिक रही कम
होलू लाला चुस्की वालों की चुस्की अभी मेले में कम बिक रही है। होलू लाला का कहना था कि वह 40 साल से मेले में स्टॉल लगा रहे हैं, लेकिन इस बार चुस्की नहीं बिक रही। उनका कहना है कि उन्होंने छोटी सी जगह 60 हजार में ली है। वैसे भी आजकल बाजार में सब सामान बिकता है तो मेले में देखने वाले ज्यादा आ रहे हैं और खाने-पीने वाले कम।
भोग कम लगा रहे, खेल तमाशों पर ज्यादा खर्चा
मेला श्रीदाऊजी महाराज के प्रसाद विक्रेता राकेश का कहना है कि इस बार उन्हें दो दुकानें चार लाख रुपये में मिली हैं। पिछली बार यही दुकानें तीन लाख रुपये में थीं। उनका कहना है कि मक्खन-मिश्री की बिक्री कम हो रही है। लोग दर्शन करने ज्यादा रहे हैं, भोग लगाने कम। खेल तमाशे और मनोरंजन पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं।