स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश को आगामी 2 अक्तूबर तक ओडीएफ घोषित करने के लिए शासन स्तर से भरसक प्रयास किए जा रहे है। इसी के चलते जिले को ओडीएफ कराए जाने के लिए जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख इख्तियार कर लिया है।
जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायतों को ओडीएफ बनाने में रुचि न लेने वाले 11 ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन ग्राम प्रधानों को जिलाधिकारी रमा शंकर मौर्य ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए हैं, साथ ही साक्ष्य के साथ स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के भी आदेश जारी कर दिए हैं। जिलाधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि अगर इन ग्राम प्रधानों के द्वारा शौचालय निर्माण के कार्यों में रुचि नहीं ली गई तो इन्हें दोषी मानते हुए इनके वित्तीय अधिकारों को समाप्त कर दिया जाएगा। ग्राम पंचायत में एक समिति का गठन कर दिया जाएगा।
डीएम ने नोटिस में यह भी साफ किया है कि इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने अपने पदीय कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया है। इन ग्राम पंचायतों के प्रधानों की लापरवाही के कारण जिले को ओडीएफ घोषित होने में विलंब हो रहा है। डीएम ने सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों को यह निर्देश दिए है कि वह एक सप्ताह के अंदर अपनी ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित कर साक्ष्य सहित उपस्थित हो।