अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने सरिया और लाठियों से जानलेवा हमला करने के तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने तीनों को चार-चार वर्ष के कारावास एवं आठ-आठ हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्तों को चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास एवं मुआवजे का 70 प्रतिशत पीड़ित को प्रतिकर दिए जाने के आदेश दिए हैं।
कोतवाली हाथरस जंक्शन में तीन जनवरी 1998 को अशोक कुमार निवासी लाड़पुर ने पुलिस को तहरीर दी। इसमें उसने आरोप लगाया कि वह अपने ही गांव निवासी भूप सिंह के तांगे में बैठकर हाथरस से लाड़पुर आया था।
जब उसने तांगे से उतरकर अपने बैग के बारे में पूछा तो उसने यकायक ही उस पर आक्रमण कर दिया। उसके साथ तीन-चार और व्यक्ति और आ गए। उन्होंने लाठी-डंडे और फरसों से प्रहार करना शुरू कर दिया, जिससे उसके हाथ-पांव और कमर में चोटें आई। तभी चंद्रप्रकाश गुप्ता ने उसे बचाने के प्रयास किए तो इन लोगों ने उन पर भी प्राण घातक हमला कर दिया, जिससे वह दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस ने मामले में भूप सिंह, गजेंद्र और भरत सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 308 के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इसके बाद वादी की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय के द्वारा साक्ष्य पेश किए गए, जिसके बाद न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया।
कोर्ट के आदेश पर चोरी की रिपोर्ट दर्ज
सादाबाद गेट निवासी गौरव वार्ष्णेय पुत्र नेमीचंद वार्ष्णेय ने कोर्ट के आदेश पर शनिवार को कोतवाली में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप था कि रोडवेज बस स्टैंड से 13 जनवरी की रात को उसका बैग चोरी हो गया था। इस बैग में उसका कीमती मोबाइल फोन था। पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। कई बार थाने के चक्कर लगाने पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। हारकर उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर शनिवार को चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया।