संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सासनी के महमूदपुर बरसै स्थित एक राइस मिल पर प्रशासन व खाद्य विभाग की टीम ने छापेमारी कर 24 हजार चावल के बोरे बरामद किए हैं। छानबीन में यह बात सामने आई कि यह चावल राशन का था और इसे कालाबाजारी कर खपाया जा रहा था। मामले में राइस मिल संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।
मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर जिलाधिकारी रमेश रंजन के निर्देश पर दोपहर दो बजे करीब एसडीएम सासनी अंजलि गंगवार की अगुवाई में जिला पूर्ति अधिकारी ध्रुवराज यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, तहसील सासनी, मंडी सचिव सासनी के साथ पूर्ति निरीक्षक सासनी द्वारा अष्टलक्ष्मी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड महमूदपुर बरसे में आकस्मिक छापा मारा।
मिल परिसर में आइशर ट्रैक्टर की ट्रॉली में जूट के बोरों में 130 कट्टा चावल पाया गया। इन कट्टो की सिलाई मशीन से होना पाई गई। प्रत्येक कट्टे पर गवर्नमेंट ऑफ हरियाणा क्रॉप ईयर कमोडिटी पैड़ी राइस छपा हुआ पाया गया। मिल परिसर के मुख्य गेट के अंदर एक ट्रैक्टर ट्रॉली अतिरिक्त खड़ी हुई मिली। हाथ की सिलाई के 470 कटटे चावल से भरे पाए गए।
जूट के चावल से भरे हुए कट्टों में उपलब्ध चावल एवं कट्टों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राशन कार्ड धारकों में वितरण कराए जाने वाले चावल को सरकारी जूट के कट्टों से पलटकर अन्य जूट के कट्टों में भरे होने की अंदेशे पर जांच शुरू की गई। टीम के द्वारा करीब छह तक छापेमार कार्रवाई के दौरान पूछताछ की गई। वहां चावल के 24 हजार बोरे मिले हैं।
इस मामले में अष्टलक्ष्मी एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रोपराइटर पुनीत अग्रवाल निवासी मोहनगंज के खिलाफ कोतवाली सासनी में राशन की कालाबाजारी के मामले में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। वहीं मौके पर मिला खाद्यान्न एवं ट्रक/ट्रैक्टर ट्राली की सुपुर्दगी थाना कोतवाली सासनी में दे दी गई। फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। इस चावल को मील में ही एक गोदाम में रखवाकर सील कर दिया गया है।
पंजाब, हरियाणा तक नेटवर्क फैला है राशन माफियाओं का
इस राइस मिल में 24 हजार चावल के बोरे मिले हैं, उसमें से काफी बोरों पर गवर्नमेंट ऑफ हरियाणा क्रॉप ईयर कमोडिटी पैड़ी राइस छपा था। इससे स्पष्ट है कि इस राइस मिल में यूपी ही नहीं बल्कि दूर-दूर के प्रांतों के राशन का चावल आता था। ऐसे में यह स्पष्ट है कि इस जिले के राशन माफियाओं के तार दूर-दूर तक जुड़े हैं। यहां पंजाब, हरियाणा से लेकर यूपी तक का राशन का चावल आता था। यहां के राशन माफियाओं का नेटवर्क दूर-दूर तक के प्रांतों में फैला है।