सिकंदराराऊ। आम का नाम आते ही जुबां पर खट्टा-मीठा स्वाद स्वत: ही घुल जाता है। आम की फसल पर छा रही बौर नई फसल के आने का संकेत दे रही है। बागवानों की मानें तो इस बार मादा फसल चक्र होने के कारण आम की पैदावार पिछले वर्ष के मुकाबले कमजोर रह सकती है, जिससे इस शौकीन लोगों के लिए इस बार आम का स्वाद महंगा होने के आसार हैं। क्षेत्र में आम के बाग बड़ी संख्या में है। क्षेत्र में लंगड़ा, दशहरी, चौसा, देसी, मुंबइया और मिट्ठा आदि किस्म के आमों के बाग हैं। वसंत पंचमी से आम के पेड़ों पर बौर आनी शुरू हो जाती है। जून के अंत में आम पककर बाजार में आ जाता है। सबसे पहले बाजार में काला मुंबइया आम आता है। इसके बाद लंगड़ा और दशहरी किस्म का आम बाजार में छा जाता है।