जिले के सभी फार्म हाउस और गेस्ट हाउस में पूरा लेनदेन नकद में किया जाता है। विशेष परिस्थितियों मेें अगर यूपीआई का प्रयोग करना पड़े तो उसके लिए भी कर्मचारियों के यूपीआई खाते में भुगतान लिया जाता है, जिससे आसानी से जीएसटी की चोरी हो जाती है।
पैकेज के नाम पर होता है खेल
कई विवाह स्थलों के संचालक टेंट व लाइट संचालकों को आगे करके कर चोरी का खेल खेल रहे हैं। आम तौर पर लेनदेन टेंट व लाइट के नाम पर किया जाता है। मालिक अपने भवन के किराये का लाइट व टेंट सहित पैकेज बताते हैं। इसे अलग-अलग इसलिए नहीं बताया जाता, ताकि कर बचाने में असुविधा न हो।
विवाह स्थलों में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बुकिंग कराने वाले संचालकों से बिल की मांग नहीं करते और न ही संचालकों द्वारा कोई लिखित दस्तावेज दिया जाता है। बुकिंग कराने वालों की तरफ से इसकी शिकायत न किए जाने के कारण राज्य कर विभाग ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं कर पाता।
यह भी जानें
-150 के करीब मैरिज होम और फार्म हाउस का हो रहा संचालन।
-04 हजार के करीब हर साल होती हैं जिले में शादियां।
-600 से अधिक शादियों में गेस्ट हाउस पर होता एक लाख से अधिक खर्च।
-100 से अधिक होती हैं आलीशान शादियां, खर्च पहुंचता है 20 लाख से ऊपर।