ग्राम पंचायत तसींगा में विकास कार्यों में बरती गई घोर लापरवाही दो परिवारों के लिए काल बन गई। तसींगा के मुख्य मार्ग से पोखर तक लगभग 300 मीटर लंबी नाली का निर्माण 10 से 15 दिनों से चल रहा था। पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई पुलिया का लेवल लेकर लगभग तीन फीट गहरी नाली की खोदाई की जा रही थी। आधे गांव के पानी की निकासी इसी रास्ते से होनी थी।
यह पूरा काम संजय कुमार (जेई) की देखरेख में होना तय था, लेकिन स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान मौके पर कोई भी इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। बिना तकनीकी सूझबूझ के स्कूल की करीब 10 साल से अधिक पुरानी और जर्जर दीवार के बिल्कुल पास लगभग तीन फीट गहरी नींव खोद दी गई।
दीवार छह फीट ऊंची व 25 फीट लंबी थी। नींव गहरी होने के कारण जर्जर दीवार का संतुलन बिगड़ गया और वह अचानक भरभराकर मलबे में तब्दील हो गई। प्रधान पति श्यामवीर सिंह ने कहा कि इंजीनियर व सचिव रोजाना गांव में आते थे, अचानक यह हादसा हुआ है।
घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी नजर आया। उन्होंने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाया। लोगों ने समझा-बुझा कर मामला शांत किया। गांव में पुलिस बल तैनात रहा।
परिजनों में कोहराम, गांव में पसरा सन्नाटा
इस हादसे के बाद से तसींगा गांव में मातम पसरा है। मृतकों के घरों से उठती चीखों ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। मृतक डालचंद्र अपने पीछे पत्नी, दो बेटों और दो बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। बच्चों में सिर्फ एक बड़ी बेटी की शादी हो पाई है, बाकी तीन बच्चे अभी कुंवारे हैं। घर के मुखिया की मौत से परिवार के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। इधर, मृतक मोहित अपने दो भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा था। मोहित अपने पिता के साथ मजदूरी कर घर का खर्च चलाने में हाथ बंटाता था। जवान बेटे की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।