लोहा के कबाड़ के कारोबार में चल रहे सिंडीकेट के जरिये करीब 989 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के तार अब हाथरस से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। राज्य जीएसटी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने जिले की कई फर्मों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जिससे स्थानीय कारोबारियों में खलबली मच गई है।
जिले में संचालित लोहा और पीतल गलाने वाली फैक्टरियों के जांच के दायरे में आने की आशंका जताई जा रही है। हाल ही में इस मामले के सरगना भगवान सिंह उर्फ भूरा प्रधान की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा होने लगा है, जिसमें कई जिलों के कारोबारियों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य जीएसटी विभाग ने जांच को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने के लिए कई जनपदों के साथ हाथरस में उपायुक्त राज्य कर खंड-1 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। एसआईटी भी विभिन्न फर्मों के लेनदेन, बिलिंग और जीएसटी रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेजों की ऑनलाइन गहन पड़ताल कर रही है।
जिले की एक फर्म पर एसआईटी द्वारा मौके पर पहुंचकर पूछताछ करने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कासगंज में पहले ही इस सिंडीकेट से जुड़ी बोगस फर्मों का खुलासा हो चुका है। अब इसी कड़ी में गिरफ्तार सरगना की निशानदेही पर हाथरस की कुछ फर्मों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
जल्द ही सेंट्रल जीएसटी में पंजीकृत कुछ फर्मों का भी बड़ा खुलासा हो सकता है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे फर्जीवाड़े का दायरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य कर विभाग के खंड-01 के उपायुक्त व एसआईटी के नोडल आरके सिंह ने बताया कि मामले की उच्च स्तरीय गोपनीय जांच की जा रही है। अभी तक हाथरस से कोई इनपुट मांगा नहीं गया है।