केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना सादाबाद क्षेत्र में विफल दिख रही है। कागजों में हर घर तक पानी पहुंचने का दावा है लेकिन धरातल पर ग्रामीणों को शुद्ध और मीठे पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। योजना के तहत पानी की टंकी लगने, पाइप लाइन बिछने के बावजूद अब तक लोगों को पानी नहीं मिला है। बजट की कमी और कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान अटकने से काम की गति धीमी हो गई है। इससे लोगों की घर में नल से पानी मिलने की उम्मीद जल्द पूरी होती नहीं दिखती।
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शनिवार शाम चार बजे ऊंचागांव (सैनपुर) रजबहे के पास लगे सरकारी हैंडपंपों पर ग्रामीणों की भीड़ देखी। आसपास के 11 गांवों की महिलाएं और बच्चे पानी भरने के लिए लाइन में लगे थे। इसी तरह पुलिस चौकी और आश्रम के पास लगे हैंडपंपों पर भी ग्रामीणों की भीड़ नजर आई।
केस-1
11 गांवों की करीब छह हजार की आबादी खारे पानी से त्रस्त
ग्राम पंचायत कजरौठी की स्थिति सबसे बदतर है। इस पंचायत में कुल 12 गांव आते हैं जिनमें से केवल एक गांव बिचपुरी का भूजल मीठा है। बाकी 11 गांवों की करीब छह हजार की आबादी खारे पानी की समस्या से त्रस्त है। पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि इसे पीने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों को तीन किलोमीटर दूर ऊंचागांव (सैनपुर) रजबहे से पानी ढोना पड़ रहा है। पल्हावत गांव के महावीर सिंह ने बताया कि मीठे पानी के एकमात्र हैंडपंप पर सुबह-शाम सैकड़ों लोगों की भीड़ रहती है। घंटों लाइन में लगने के बाद पानी भरने का मौका मिलता है जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को अधिक परेशानी होती है। सादाबाद की ग्राम पंचायत कुरसंडा में भी खारे पानी की समस्या है जहां नौ हजार की आबादी प्रभावित है। यहां पानी का टीडीएस अधिक होने के कारण भूमिगत जल पीने योग्य नहीं है।
केस-2
दो हैंडपंप के सहारे साढ़े तीन हजार की आबादी
ग्राम पंचायत नसीरपुर के गांव रसमई की रहने वालीं गीता देवी ऊंचागांव स्थित सत्संग आश्रम के पास लगे हैंडपंप से पीने का पानी भरते मिलीं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं और तब से वह गांव की महिलाओं को हर दिन पैदल कई किलोमीटर दूरी तय कर पानी लाते देख रही हैं। अब यह दिनचर्या का हिस्सा हो चुका है। इस पंचायत के गांव नगला मियां में भी खारे पानी की समस्या बनी हुई है। वहां के लोग ऊंचागांव पुलिस चौकी के पास स्थित हैंडपंप से मीठा पानी लेकर आते हैं। इन दोनों गांवों में साढ़े तीन हजार लोग रह रहे हैं।
केस-3
सादाबाद की ग्राम पंचायत छावा में गांव छावा, नगरिया व कुम्हरई में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। गांव छावा से करीब दो किलोमीटर दूर सरौंठ वाला बंबा के पास लगे हैंडपंप पर लोग पानी भरते नजर आए। यहां अर्जुन सिंह ने बताया कि इन गांवों में टीटीएसपी योजना के अंतर्गत पानी की टंकी लगी थीं लेकिन वे कुछ सालों में ही ध्वस्त हो गईं। यहां जल जीवन मिशन के अंतर्गत काम नहीं हुआ है। इन तीनों गांवों की करीब आठ हजार की आबादी प्रभावित है। महिलाओं का सुबह व शाम का समय पानी भरकर लाने में जाता है।
2022 में शुरू हुआ काम, अभी तक अटका
जिले में वर्ष 2022 में जल जीवन मिशन के अंतर्गत काम शुरू हुआ था। दिल्ली की ब्रजगोपाल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को 496 गांव तथा गुजरात की आयन एक्सचेंज को 102 गांव दिए गए थे। इनका कुल बजट 806 करोड़ है। कंपनियों की ओर से गांवों में पाइपलाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक, पंप हाउस निर्माण और ट्रायल रन का कार्य किया जा रहा है। ये कार्य मार्च 2025 तक पूरे करने थे लेकिन अब अवधि बढ़ाकर 2027 कर दी गई। इन दोनों फर्मों का करीब 200 करोड़ का भुगतान अटका है। इस कारण योजना के कामों की रफ्तार धीमी हो गई है।
मिशन का 60 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। भुगतान की धनराशि धीरे-धीरे आ रही है। इससे कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान किया जा रहा है। काम पूरे करने की अवधि 2027 कर दी गई है। कजरौठी, छावा व कुरसंडा सहित सभी प्रभावित इलाकों में जल्द काम पूरा कर घरों तक पानी पहुंचाया जाएगा। कार्य कर रहीं फर्मों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण, जल निगम