पुरदिलनगर के मूंगा-मोती की चमक फीकी पड़ती जा रही है। 15 साल पहले यहां के जिस मूंगा-मोती का कारोबार चार हजार करोड़ रुपये सालाना तक था, वह अब 50 करोड़ रुपये सालाना पर सिमट गया है। सैकड़ों कारोबारियों ने इस काम से मुंह मोड़ लिया है। नई पीढ़ी इस कारोबार में रुचि नहीं ले रही है। इसकी मुख्य वजह गैस आपूर्ति, महंगा ट्रांसपोर्ट, कच्चा माल और इकाई लगाने के लिए जमीन का अभाव है।
पुरदिलनगर में मूंगा-मोती बनाने का काम आजादी से पहले का है। काम के विस्तार के साथ कई तरह के हस्तनिर्मित नग भी बनने लगे, जिनकी मांग विदेशों में भी थी। कारोबारियों के अनुसार यहां बने मूंगा-मोती सऊदी अरब, दुबई और अमेरिका तक निर्यात हो रहे थे। देश में दिल्ली, मुंबई, वाराणसी, हरिद्वार, मथुरा और आगरा में इन मूंगा-मोती की खासी मांग रहती थी।
प्रशासन की उपेक्षा के चलते इस कारोबार को बढ़ाने के लिए कारोबारियों को मदद नहीं मिली। अब बाजार में चीन के उत्पाद आने पर पुरदिलनगर का यह कारोबार तेजी से पिछड़ा है।
कच्चे माल से सस्ता पड़ रहा चीन का माल : कारोबारी कमल माहेश्वरी बताते हैं कि करीब 15 साल पहले पुरदिलनगर के मूंगा-मोती का कारोबार सालाना चार हजार करोड़ रुपये का था। अब सालाना 50 करोड़ रुपये रह गया है। पहले माल तैयार करने के लिए भट्टी में केरोसिन का इस्तेमाल होता था, लेकिन जब से केरोसिन मिलना बंद हुआ तो लागत महंगी हो गई। चीन के उत्पाद यहां के कच्चे माल से भी सस्ते हैं, जिसे लोगों ने हाथों-हाथ खरीदना पसंद किया। उन्होंने कहा कि यहां बने माल को सस्ता करने के लिए उद्योग को सरकारी मदद की आस है। गैस आपूर्ति, ट्रांसपोर्ट के सस्ते साधन व जीएसटी से मुक्ति कारोबारियों की प्रमुख मांगे हैं।
मूंगा-मोती के कारोबार से मुंह मोड़ रही नई पीढ़ी
कारोबारी हर्षकांत कुशवाहा कहते हैं कि युवा पीढ़ी मूंगा-मोती के कारोबार से मुंह मोड़ रही है। 15 साल पहले करीब एक हजार कारोबारी इससे जुड़े थे। अब 200 कारोबारी ही इस कारोबार में हैं। यहां के नग और मूंगा-मोती के काम से कांग्रेस सांसद प्रियंका वाड्रा और उनके पति राबर्ट वाड्रा भी जुड़े थे। कई बार प्रियंका वाड्रा यहां आ चुकी हैं। तकनीकी के अभाव में यहां का कारोबार पिछड़ गया है।
महाकुंभ में भी चमका था मूंगा-मोती
प्रयागराज महाकुंभ में तीन करोड़ से अधिक का मूंगा-मोती पुरदिलनगर से भेजा गया था। कारोबारियों के मुताबिक महाकुंभ में यहां के हस्तनिर्मित नग और मूंगा-मोती से बने कड़े, माला और अन्य आयटमों की काफी मांग थी।
वर्जन-
मूंगा-मोती कारोबारी अपना जो भी मांग पत्र देंगे, उसे शासन को भेज दिया जाएगा। शासन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रहा है। -अजिलेश कुमार, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र।
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-कारोबार एक नजर में-
15 साल पहले अब
कारोबारी 1000 200
टर्नओवर 4000 करोड़ 50 करोड़ (सालाना)
भट्टी 50 20
मजदूर 2500 700-800 (करीब)
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