शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। यदि शहर में लगे गंदगी के ढेर खत्म हों, तब शहर सुंदर दिखेगा। सीवेज फार्म की भूमि पर भी कूड़ा निस्तारण के लिए लगाया गया प्लांट भी शहरवासियों को गंदगी से निजात नहीं दिला पाया। करीब 40 हजार मीट्रिक टन कूड़े का ढेर लगा हुआ है। बदबू के चलते लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। गंदगी के चलते लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि शहर के 35 वार्डों में 32 हजार घरों से हर रोज तीन से चार टन कूड़ा निकलता है। नगर पालिका प्रशासन के पास कूड़ा निस्तारण के लिए ठोस इंतजाम नहीं हैं। इस कारण शहरवासियों को गंदगी से निजात नहीं मिल पा रही है। नगर पालिका ने कूड़े से गंदगी न फैले, इसके लिए घर-घर सीटी बजाकर कूड़ा संकलन का कार्य शुरू कराया था।
घरों से निकलने वाले कूड़े को दो श्रेणी में बांटा गया था। सूखा कूड़ा व गीला कूड़ा। इसको अलग-अलग करने की योजना भी तैयार की गई। खास बात यह है कि गीला व सूखा कूड़ा अलग करने की बजाय डंपिंग ग्राउंड में एक ही स्थान पर पड़ा है। वहां लगा प्लांट भी वहां लगे कूड़े के ढेरों का निस्तारण नहीं कर पाया है। इस कारण शहर के जलेसर रोड पर रहने वाले और यहां से गुजरने वाले लोगों को बदबू का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान में करीब 40 हजार मीट्रिक टन कूड़ा
शहर के जलेसर रोड सीवेज फार्म की भूमि पर बने प्लांट में वर्तमान में करीब 40 हजार मीट्रिक टन कूड़ा एकत्रित है। करीब 20 हजार टन कूड़े का पूर्व में निस्तारण हो चुका है। समय अवधि के हिसाब से निस्तारण की चाल काफी धीमी है।
सूखे कूड़े से बनाई जानी थीं ईंटें और गीले से खाद
कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाते समय यह तय किया गया था कि सूखे कूड़े का प्रयोग ईंटें बनवाने में किया जाएगा, जबकि गीले कूड़े से खाद बनाया जाएगा। इन ईंटों का प्रयोग सरकारी निर्माण कार्य में किया जाना था। गीले कूड़े से बनने वाले खद का प्रयोग जैविक खेती में करने की योजना थी, लेकिन अभी तक प्लांट के जरिए कोई नया कार्य शुरू नहीं किया गया। इस कारण कूड़े के ढेर खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
वार्ड में सबसे बड़ी समस्या कूड़े की है। वार्ड में इस कारण गंदगी का अंबार रहता है। यदि कूड़ा निस्तारण हो जाए और लोगों को जागरूक किया जाए तो काफी हद तक शहर को सुंदर बनाया जा सकता है।
-राकेश कुमार, सभासद वार्ड संख्या पांच
शहर का क्षेत्रफल ज्यादा नहीं है। इस हिसाब से कूड़ा निस्ताारण के लिए ठोस इंतजाम नहीं हैं। यदि शहर में गंदगी का खात्मा हो जाएगा तो काफी हद तक शहर सुंदर दिखाई देगा। नवनियुक्त चेयरमैन को गंदगी पर लगाम लगाने के लिए कार्य योजना बनानी चाहिए।
-रामकुमार, शहरवासी
शहर में कूड़ा डालने के लिए अधिकांश स्थानों पर स्थान चयनित नहीं हैं। इस कारण बीच सड़क पर सुबह से दोपहर तक कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इस कारण गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है। सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
-सुनील कुमार, शहरवासी
शहर में सफाई के संसाधनों की निगरानी सही तरीके से होनी चाहिए। जो व्यवस्थाएं चल रही हैं, वह सही हैं या नहीं। गंदगी की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। गंदगी के कारण शहर में प्रदूषण बढ़ रहा है।
-राजेंद्र प्रसाद, शहरवासी
शहर वासियों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए योजना बनाकर लगातार काम किया जाएगा। सफाई की बात है तो खुद निरीक्षण कर व्यवस्था को देखा जाएगा। स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए कूड़े का निस्तारण कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
-श्वेता दिवाकर, नवनिर्वाचित नगर पालिकाध्यक्ष हाथरस