हाथरस के गांव लाड़पुर में 1 जनवरी शाम रामकथा में श्रीरामभद्राचार्यजी ने पंचवटी-सीता हरण, हनुमान सुग्रीव मिलन प्रसंग का मार्मिक तरीके से वर्णन किया। देर रात आई बारिश के चलते मुख्य कथा पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया था। आठवें दिन की कथा के लिए कथा स्थल में परिवर्तन किया गया। खराब मौसम के बाद भी श्रोता बड़ी संख्या में कथा सुनने के लिए पहुंचे थे। आयोजन से जुड़े लोगों की मानें तो आठवें दिन गुरू देव थोड़े के अस्वस्थ दिखे।
रामकथा में श्रीरामभद्राचार्यजी ने हनुमान चालीसा के साथ कथा की शुरूआत की। उन्होंने सीता-हनुमान संकीर्तन किया। चौपाई वन वासि कीनेद्र चरित अपारा, कह हु नावाजिमि रावण मारा सुनाया। वर्णन करते हुए कहा, प्रभु सुतीक्षण से मिले, अगस्त मुनि से मिले, प्रभु पंचवटी पहुंचे। सूर्पनखा के आगमन की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि मोहित होकर सुर्पनखा सीता को खाने दौड़ी, तब रामजी के इशारे पर लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। सुर्पनखा रावण के दरबार में पहुंची और सारा वृतांत कहा। इधर रामजी ने सीता से कहा कि अब में नर लीला कंरुगा, आप अग्रिदेव में निवास करें, जब तक निशाचरों का नाश न कर दूं। वहीं, श्रीरामभद्राचार्यजी ने वर्णन करते हुए कहा कि वन में प्रभु स्पारिक शिला पर बैठे हैं। बहुत सुंदर लग रहे हैं। प्रमु सीता माता का श्रंगार कर रहे हैं, प्रभु स्वंय आभूषों के रूप में मां की शोभा बढ़ा रहे हैं। वहीं, पंचवटी से सीता हरण व रावण जटायू युद्ध की कथा सुनाई। हनुमंत लाल के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि सुग्रीव द्वारा हनुमानजी को रामजी का भेद लेने को भेजा गया। इस बीच प्रसंग के माध्यम से पं. गयाप्रसादजी व काका हाथरसी का भी स्मरण किया। रामभद्राचार्य कहते हैं कि जयंत ने सीताजी के चरण में चोंच मारी।
कथा के दौरान यजमान संजय शर्मा, राकेश छतारीवाले, हिमालय वार्ष्णेय, टिंकू अग्रवाल, राहुल वार्ष्णेय, अमित कुमार ने पादुका पूजन किया। व्यवस्था दीपक शर्मा, दीपक मृद्गल, राहुल, रवेन्द्र शर्मा, नीरेश, हिप्पी, नरेन्द्र सिंह, रिंकू शर्मा, माधव जोशी, गौरव आदि ने देखी। कथा में डॉ. पीपी सिंह, बुलंदशहर से एएसपी रोहित मिश्रा पत्नी के साथ दर्शनों को पहुंचे। कथा के आठवें दिन पधारे गुरुदेव के उत्तराधिकारी रामचन्द्र दासजी ने संत गयाप्रसादजी का स्मरण करते हुए कहा कि पवनपुत्र की कथा है, इसी कारण रात्रि में पवन का विशेष आगमन हुआ है। जिस कारण कथा स्थल परिवर्तित हुआ। अयोध्या में श्रीराम लला विराजमान हुए अब काशी की बारी है। ज्ञानवापी में पूजा अर्चना प्रारम्भ हो चुकी है। अमृतकाल में देश में बहुत अलौकिक कार्य होने हैं।
31 जनवरी रात्रि में आई आंधी में रामकथा के लिए बनाया गया पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया। आयोजकनों ने दूसरे दिन यानी आठवें दिन की कथा के लिए मुख्य यजमान के कोल्डस्टोरेज प्रांगण में आयोजन की व्यवस्था की। जानकारों की मानें तो बृहस्पतिवार को श्रीरामभद्राचार्यजी का स्वास्थ्य भी कुछ सही नहीं रहा। दिन के समय तमाम दर्शन देने वालों को राम कथा शुरू होने तक का इंतजार करना पड़ा।