सादाबाद। क्षेत्र के ग्राम कुरसंडा में रविवार को जाट आरक्षण संघर्ष समिति की एक सभा हुयी लेकिन काफी प्रचार-प्रसार के बावजूद भी इस सभा में जाट समाज के अपेक्षित संख्या में लोग नहीं जुट सके। सभा में जाट आरक्षण पर चर्चा कम और राष्ट्रीय लोकदल का गुणगान अधिक हुआ। सभा में भाग लेने आए एक भाजपा कार्यकर्ता सभा के समाप्त होने के बाद वक्ताओं द्वारा प्रधानमंत्री को आरक्षण के मामले में आरोपित करने पर बिफर पड़े। सभा की अध्यक्षता डॉ. राजवीर सिंह व संचालन कुंजल सिंह एड. ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र चौधरी ने कहा कि किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह ने तो वर्ष 1940 में ही खेती में लगे किसानों के बच्चों को 60 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा था और बाद में गृहमंत्री व प्रधानमंत्री बनने पर देश के पिछड़े तबके को आरक्षण दिलाने के लिए मण्डल आयोग की स्थापना की थी और बाद में उनकी सरकार गिरने के बाद राजनैतिक साजिश के तहत मण्डल आयोग से जाटों को बाहर कर दिया गया और उनके स्थान पर अन्य जातियों को पिछड़ी जातियों में शामिल कर दिया गया। वर्ष 1990 में चौ. अजीत सिंह ने अनेक सांसदों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र केन्द्र सरकार को सौंपा था जिसमें जाटों को आरक्षण दिए जाने की बात कही थी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जाट समाज ने भाजपा का साथ दिया और 17 मार्च 2015 को जाटों को पिछली यूपीए सरकार में मिले केन्द्रीय सेवाओं में आरक्षण को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया। जिसे लेकर तमाम जाट समाज के लोग प्रधानमंत्री से मिले थे और प्रधानमंत्री ने भी जाट समाज के लोगों को आश्वस्त किया था लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जाट समाज का केन्द्रीय सेवाओं में आरक्षण बहाल नहीं किया गया है। उसके बाद मोदी सरकार ने बडे चौधरी के समय से किसानों की आस्था का केन्द्र रही 12 तुगलक रोड कोठी को भी खाली कराकर किसानों और जाट समाज का अपमान किया। सभा में मौजूद जाट समाज के लेागों से 2017 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा को वोट नहीं देने का आहवान किया।
सभा को पूर्व विधायक डा. अनिल चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा कि चौधरी साहब के समय में खेतों में काम करने वालों की किसान जाति थी जिससे हम सब भटक गए हैं और चौधरी साहब का जो मिशन था वह कमजोर हुआ है। रालोद के वरिष्ठ नेता गिरेन्द्र चौधरी ने कहा कि जाट समाज ने आजादी से पहले देश की स्वतंत्रता के लिए और आजादी के बाद चीन व पाकिस्तान से होने वाले युद्धों व आतंकवाद से मुकाबला करने में भी अपनी कुरबानियां दी हैं। उन्होने सरदार भगत सिंह का हवाला देते हुए कहा कि उन्होने 23 वर्ष की उम्र में देश के लिए फांसी का फंदा चूम लिया था। चौ. अजीत सिंह ने यूपीए सरकार में रहकर दबाव बनाते हुए केंद्रीय सेवाओं में जाटों को आरक्षण दिलाया था फिर भी हमारे अपने ही समाज ने चौ. अजीत सिंह व जयंत चौधरी को हराया। रालोद के प्रदेश सचिव प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने कहा कि जाट समाज को अपनी सोच बदलनी होगी क्योंकि हमारी सोच अभी सिर्फ पुलिस के सिपाही व फौज के सिपाही बनने की है हमें उससे ऊपर उठकर अपने बच्चों को आईएएस, पीसीएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर बनाने के बारे में सोचना चाहिए और योग्यता के साथ-साथ आरक्षण भी इन नौकरियों में अतिआवश्यक है।
सभा को डा. कालीचरन सिंह, चौ. जगमाल सिंह चहल, डा. अजय चौधरी, राजेश चौधरी, केपी सिंह, अशोक चौधरी, आशीष चौधरी, एदल सिंह, रमेंश सिंह ठैनुआं, केपी सिंह एड. ईशान चौधरी आदि ने भी विचार व्यक्त किए। सभा के दौरान रमेंश सिंह ठैनुआं को रालोद के जिलाध्यक्ष पद से हटाए जाने की विशेष रूप से वक्ताओं ने चर्चा की तथा कईयों ने बिना कारण उनको पद से हटाने पर आक्रोश भी व्यक्त किया।
सभा में कुरसण्डा के प्रधान प्रतिनिधि शक्ति सिंह, अखिलेश सिंह एड., सुल्तान सिंह, केशव चौधरी, चौ. हरप्रसाद सिंह, नत्था सिंह सूबेदार, किशनराज सिंह, यतेन्द्र चौधरी, जितेन्द्र बधौतिया एड., राधाकृष्ण सिंह, कारे सिंह, रूपेश चौधरी आदि मौजूद थे।