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रावण के पुतले में झोंक दिया बच्चों का भविष्य

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रावण के पुतले में सरकारी किताबों के इस्तेमाल पर हंगामा
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पॉलीटेक्निक के मैदान में कांग्रेसियों ने किया जोरदार प्रदर्शन, प्रशासन में मची खलबली
प्रशासन ने बताया कि यह ट्रायल चार्ट है न कि सरकारी किताबें
कुछ पन्नों पर सत्र 2019-20 व 2018-19 लिखा हुआ था
पुतला ठेकेदार ने कहा - अलीगढ़ से खरीदी किताबों की रद्दी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। रावण के पुतले में सरकारी किताबों के इस्तेमाल पर पॉलीटेक्निक के मैदान में विजयादशमी के दिन कांग्रेस नेताओं ने जमकर हंगामा किया। रावण का पुतला बनाने में उन किताबों के पन्नों का इस्तेमाल किया गया, जो सरकारी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाई के लिए निशुल्क वितरित की जाती हैं। यह किताबें रावण का पुतला बनाने वाले ठेकेदार ने अलीगढ़ के एक व्यापारी से रद्दी के रूप में खरीदी थीं। इसकी जानकारी जैसे ही स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को हुई तो उन्होंने पुतला दहन स्थल पर जमकर प्रदर्शन किया।
प्रशासन को जैसे ही इस मामले का पता चला तो अधिकारियों में खलबली मच गई। आनन फानन एडीएम और एसडीएम मौके पर पहुंच गए और पूरे मामले की जानकारी ली। इस पूरे मामले को कई घंटे तक यह भी संशय रहा कि आखिर हाथरस में इस बार पुतला दहन होगा कि नहीं। बाद में जब प्रशासन ने इन्हें सरकारी किताब मानने से इंकार कर दिया। तब जाकर पुतला फूंका गया।
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उधर, डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार का कहना है कि पुतला बनाने में किताबें इस्तेमाल नहीं की गई हैं। जिन कागजों को पुतले में लगाया गया है, वह किताब छापे जाने से पूर्व ट्रायल हेतु चार्ट के रूप में तैयार किए गए पृष्ठ हैं। जिन पर किताबों को पृष्ठों की छपाई मात्र है। हुआ यूं कि इस बार भी पॉलीटेक्निक के मैदान में कई दिन से 70 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा था। यह ठेका मोहल्ला नवीपुर निवासी विनोद कुमार ने लिया था। विनोद कुमार इसके लिए अलीगढ़ से रद्दी भी लाए थे।
उन्होंने बांस व अन्य सामग्री से बनाए गए पुतले पर रद्दी चिपका दी। मंगलवार की सुबह कुछ कांग्रेसी पॉलीटेक्निक मैदान पर पहुंचे। उनकी नजर जब पुतले में इस्तेमाल किए गए कागजों और वहां पड़ी रद्दी पर पड़ी तो वह चौंक गए। पुतले में सरकारी किताबों के पन्नों का इस्तेमाल किया गया था। कुछ पन्नों पर सत्र 2019-20 व 2018-19 लिखा हुआ था और यह भी लिखा था कि यह पुस्तकें निशुल्क वितरण के लिए हैं।
कांग्रेसियों का कहना था कि सरकारी किताबें, जोकि बच्चों को निशुल्क पढ़ने के लिए दी जाती हैं, वह स्कूलों की जगह रद्दी में बाहर आ गई और इस पुतले में लगा दी गई। कांग्रेसियों ने वहां इस बात को लेकर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने शिक्षा माफिया और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।
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आनन-फानन एडीएम डॉ. अशोक कुमार शुक्ला और एसडीएम सदर नीतीश कुमार सिंह वहां पहुंच गए और पुतला देखने के साथ साथ वहां पड़ी रद्दी भी देखी। इन अधिकारियों ने जांच पड़ताल शुरू कर दी। पुतला बनाने वाले ठेकेदारों से पूछताछ की। उसने भी यही बताया कि उसने अलीगढ़ की एक दुकान से 30 रुपये किलो में यह रद्दी खरीदी है। उसे नहीं मालूम कि यह सरकारी किताबों की रद्दी है या प्राइवेट की। अधिकारियों ने यह बारीकी से देखा तो यह भी दिखाई दिया कि जो रद्दी थी वह चार्ट के रूप में थी। इससे अधिकारियों ने डीएम को अवगत कराया।
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