दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में लगाई गई प्रदर्शनी में प्रदेश के कई जिलों के औद्योगिक उत्पादों को शामिल किया गया है। उनके स्टॉल भी वहां लगाए गए हैं, लेकिन हाथरस के हींग उद्योग को यहां जगह नहीं मिली, जिससे यहां के उद्यमी मायूस हैं। उद्यमियों का कहना है कि अगर हींग उद्योग को प्रदर्शनी में शामिल किया गया होता तो निश्चित रूप से उन्हें बड़ा फायदा होता।
हाथरस की हींग की महक देश भर में फैली हुई है, लेकिन दिल्ली में चल रहे जी-20 शिखर सम्मेलन तक यह नहीं पहुंच पाई। जिले के हींग उद्यमियों को उम्मीद थी कि जी-20 में हाथरस का हींग उद्योग अपनी खुशबू बिखेरेगा, लेकिन ऐसा हो न सका। उद्यमियों का कहना है कि अगर शिखर सम्मेलन तक हींग उद्योग की गूंज पहुंचती तो निश्चित रूप से इस उद्योग को और पंख लगते। उनका कहना है कि आने वाले समय में जिले के उद्यमियों के साथ सरकारी महकमों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को प्रयास करना चाहिए कि हाथरस का हींग उद्योग नई ऊंचाइयों तक पहुंच सके।
दिल्ली से हाथरस की दूरी काफी कम है। हमें उम्मीद थी कि हाथरस के हींग उद्योग को इस प्रदर्शनी में शामिल किया जा सकता है, लेकिन शासन स्तर पर शायद उद्योग मानक पूरे न कर पाया हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वह आगे इस तरह के मौके को भुनाने में पीछे न हटें।
-हृदेश कुमार शर्मा, हींग कारोबारी
हाथरस का हींग कारोबार अपने आप में अच्छा लघु उद्योग है। इसे जी-20 में लगी प्रदर्शनी में शामिल किया जाना चाहिए था। इससे हाथरस के हींग उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलता। आगे उद्यमियों को चाहिए कि वह आगे इस तरह के आयोजनों में प्रतिभाग करने के लिए प्रयास करें।
-राकेश बंसल, हींग कारोबारी
सही बात है कि कई जिलों के उद्योगों को जी-20 समिट में शामिल किया गया है, लेकिन इसके लिए जिला स्तर से कोई प्रस्ताव नहीं मांगे गए थे। शासन स्तर से ही उत्पादों का चयन किया गया है। शासन के ओडीओपी प्रकोष्ठ की ओर से ही निर्णय लिए गए हैं।
-अजलेश कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र