सरसों की फसल पर पाले और रोगों का खतरा। संवाद
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कोहरे और पाले के कारण सरसों की फसल खराब हो रही है। इसमें सफेद रतुआ, तना गलन, अल्टरनेरिया ब्लाइट और फूलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह ने किसानों को समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि रोगों से बचाव के लिए हल्की सिंचाई करें। पाले के प्रभाव को कम करने के लिए एक प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करें। सल्फर के छिड़काव से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।
अत्यधिक सर्दी में 1000 लीटर पानी में एक लीटर गंधक का तेजाब और आधा लीटर डाई मिथाइल सल्फो ऑक्साइड मिलाकर छिड़काव करना प्रभावी रहता है। 500 ग्राम थायो यूरिया को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर के अनुसार छिड़काव करें। पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी न होने दें, ये पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।