नगर पालिका परिषद के नलों से अमृत नहीं, बल्कि पानी की शक्ल में काला जहर निकल रहा है। जगह-जगह क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन में सीवरेज व ड्रेनेज का गंदा पानी मिला रहा है। यही नहीं क्षतिग्रस्त पाइपों से शुद्ध पेयजल सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है।
अमृत पेयजल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने में हद दर्जे की लापरवाही बरती गई, जिसका खामियाजा उन लोगों को उठाना पड़ रहा है, जो केवल नगर पालिका की जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में शहर में इंदौर जैसे भीषण जलजनित हादसे की आशंका गहराने लगी है।
लापरवाही के तीन बड़े केंद्र : महीनों से बह रहा पानी
केस-1
मथुरा रोड मधुगढ़ी पेट्रोल पंप के निकट
इस व्यस्ततम सड़क से होकर अमृत पेयजल योजना की पाइपलाइन गुजरती है, जो ओढ़पुरा पानी की टंकी से लेकर रामनगर कॉलोनी, हीरालाल क्वार्टर, मधुगढ़ी व तालाब चौराहा तक पानी की सप्लाई पहुंचाती है। पेट्रोल पंप के निकट पिछले तीन महीने से पाइपलाइन लीक कर रही है। पहले केवल साफ पानी सड़क पर बहता था, लेकिन पिछले एक माह से सुबह व शाम पानी आपूर्ति के दौरान काला नाले का पानी बहता है।पाइपलाइन में लीकेज के कारण हुए जलभराव से मुख्य पेयजल लाइन में गंदा पानी रिवर्स सक्शन के जरिये समा रहा है। इस कारण मधुगढ़ी के करीब 250 घरों ने पानी पीना बंद कर दिया है। यहां करीब 2000 लोग सीधे प्रभावित हैं। स्थानीय निवासी आबिद ने बताया कि नगर पालिका में शिकायत की तो गड्ढा बंद करके चले गए, लेकिन लीकेज ठीक नहीं की।
केस-2
काका हाथरसी स्मारक के सामने (मुरसान गेट)
यहां मुख्य सड़क पर पिछले कई महीनों से अमृत योजना की पाइपलाइन फटी हुई है। रोजाना हजारों लीटर साफ पानी बहकर सड़क को गड्ढे में तब्दील कर रहा है, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है। एक दुकानदार ने बताया कि यह सुबह छह बजे पानी की सप्लाई आते ही पानी बहना शुरू हो जाता है। इसी तरह शाम को पानी सीसी सड़क की दरारों से बहकर गड्ढों में जमा होने लगता है।
केस-3
कोटा रोड
ओढ़पुरा बिजलीघर के सामने जैसे ही कोटा रोड पर चलेंगे तो 10 कदम की दूरी पर मंदिर के सामने सड़क से पानी रिसता मिलेगा। सुबह व शाम पानी बहने से मंदिर के सामने हर समय पानी भरा रहता है। पड़ोस में ही रहने वालीं भगवान देवी ने बताया कि जब से पाइपलाइन बिछी है, तब से पानी लीक हो रहा है। बीच में गहरा गड्ढा हो गया था, जिसे कंक्रीट से बंद कर दिया गया, लेकिन अब भी पानी गड्ढे से ऐसे बहता है जैसे पहाड़ों से बह रहा हो।
इंदौर जैसी त्रासदी की आहट
पिछले वर्ष मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैली महामारियों और मौतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन सबक लेने के लिए तैयार नहीं है। इन इलाकों के अलावा सर्कुलर रोड, भूरापीर, लाला का नगला, कैलाश नगर, सीकनापान गली, दिल्ली वाला चौक, सादाबाद गेट, आवास-विकास कॉलोनी आदि इलाकों में 20 हजार से अधिक लोग लीकेज से प्रभावित हैं। नलों तक दूषित पानी पहुंचने से उल्टी, दस्त, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा है।
अमृत योजना एक नजर में
-2018 में शुरुआत हुई, वर्ष 2022 में काम पूरा हुआ।
-200 किमी लंबी पाइपलाइन सात जोन में बांटकर बिछाई।
-25,235 घरों को पेयजल के लिए दिए गए कनेक्शन।
-प्रोजेक्ट पर 95 करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर भी परेशानी।
-80 लाख रुपये का सालाना जलकर वसूलती है पालिका।
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बीच में लीकेज की शिकायतें मिली थीं, जिन्हें सही कराया जा चुका है। जहां-जहां लीकेज संज्ञान में आएंगे, उन्हें ठीक कराया जाएगा। जलकल की टीम क्षेत्र में लगाई गई हैं।
-रोहित सिंह, ईओ नगर पालिका परिषद हाथरस