जिले में गर्मी की दस्तक के साथ ही पेयजल व्यवस्था का सच लोगों के सामने आने लगा है। नगर पालिका के दावों की पोल गली-मोहल्लों में लगे वे हैंडपंप खोल रहे हैं, जो लंबे समय से खराब पड़े हैं। शहर के 35 वार्डों में करीब 193 हैंडपंप खराब हैं। ऐसे में प्यास बुझाने की आस में इनके नजदीक पहुंचने वालों को निराशा ही हाथ लगती है।
हैरानी की बात यह है कि शहर की प्यास बुझाने के लिए 3.27 करोड़ का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया था। योजना के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में 400 नए हैंडपंप लगाए जाने थे। 12 नवंबर को हुई बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव स्वीकृत भी किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर अभी तक एक भी हैंडपंप नहीं लग सका है। यहां तक की टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है।
शहर के कई मोहल्लों में स्थिति विकट बनी हुई है। शहर के पुराने वार्डों में सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं। यहां नगर पालिका की पाइपलाइन भी बिछी है, लेकिन जल दूषित होने की आशंका से कोई पाइप लाइन के पानी को प्रयोग में नहीं लेता। लोग या तो आरओ प्लांट से पानी खरीदते हैं या फिर आस-पड़ोसियों की समर्सिबल पंप के भरोसे हैं।
100 हैंडपंप री-बोर व 50 नए लगाए
पिछले दो महीनों में नगर पालिका के जलकल विभाग की टीम ने केवल लंबित शिकायतों पर काम किया है। आईजीआरएस व अन्य सिफारिशों के आधार पर क्षेत्र में जनवरी व फरवरी में 100 हैंडपंप री-बोर कराए गए हैं और 50 नए लगाए गए हैं। इसके बाद भी लोगों की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। पालिका ने इतने ही हैंडपंपों का प्रस्ताव तैयार रखा है, जो कि अगली बोर्ड की बैठक के इंतजार में है।
क्षेत्र में 40 में से 17 हैंडपंप खराब पड़े हैं। लोग हमसे शिकायत करते हैं और हम नगर पालिका के चक्कर काटते हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता। जलकल विभाग से जवाब मिलता है कि टीम नहीं है, जो हैंडपंपों की मरम्मत करे।
-राकेश कुमार, सभासद वार्ड 5
क्षेत्र में 30 में से लगभग 26 सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। कई शिकायतों के बाद पिछले महीने केवल दो हैंडपंप लगे हैं। री-बोर भी नहीं किए गए। क्षेत्र की जनता परेशान रहती है। नगर पालिका के नलों में सुबह व शाम पानी आता है।
-मनीष अग्रवाल, सभासद वार्ड 35
सरकारी हैंडपंपों से पानी भरना तो भूल ही चुके हैं। पानी की कैन खरीदकर काम चलाते है। नहाने व अन्य घरेलू कार्याें के लिए समरर्सिबल पंप से पानी का इंतजाम करना पड़ता है।
मुकेश कुमार, सीकनापान गली
शहर में सरकारी नलों पर अब लोग पानी भरते नजर नहीं आते। वर्षों तक हैंडपंप खराब पड़े रहते हैं। हमारी गली का भी यही हाल है। पेयजल के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है।
-हेमंत कुमार, रेवाड़पुरा
शिकायतों पर प्रस्ताव तैयार करा हैंडपंपों की मरम्मत कराई जाती है। हाल ही में में 100 हैंडपंप री-बोर किए गए हैं। नए भी लगाए गए हैं। शेष खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार हो चुका है। प्रस्ताव पास होते ही हैंडपंप ठीक कराए जाएंगे।
-हर्षवर्धन, जेई जलकल विभाग, नगर पालिका परिषद हाथरस