स्वास्थ्य महकमे की अनदेखी के कारण अब मेडिकल स्टोर संचालक ही अपनी दुकानों पर डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। शनिवार को जलेसर रोड चौराहा स्थित एक मेडिकल स्टोर पर एक मरीज को चारपाई पर लेटाकर ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया तो स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई। आनन-फानन सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ और डीआई ने मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर मामले की जांच-पड़ताल की।
दोपहर साढे़ 12 बजे एसीएमओ (प्रतिरक्षण) डॉ. विजेंद्र सिंह और डीआई पूरनचंद्र जलेसर रोड चौराहा स्थित मनीष मेडिकल स्टोर पर पहुुंचे। यहां इन अफसरों ने मेडिकल स्टोर संचालक मनीष साहनी से पूछताछ की। एसीएमओ ने बताया कि मनीष साहनी ने पूछताछ में बताया है कि यह उनकी दुकान पर कोई क्लीनिक नहीं चलता और न ही किसी मरीज को बोतल के जरिए ब्लड चढ़ाया गया है। उसकी दुकान पर काम करने वाले लड़के ने बीते माह 25 मई को अपने बाबा को जेक्टोफर नाम का आयरन का इंजेक्शन ड्रिप में लगाकर चढ़ाया था।
एसीएमओ ने बताया कि मौके पर उसी लड़के से जब फिर से इसी तरह की ड्रिप लगाने को कहा गया तो उसने ड्रिप लगा दी। इससे यह सिद्ध होता है कि मेडिकल स्टोर पर क्लीनिक चलने की बात सही थी। इंजेक्शन के जरिए इन्फेक्शन भी फेल सकता है, जिससे किसी की भी जान जा सकती है। मेडिकल स्टोर संचालक को मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की आड़ में क्लीनिक चलाए जाने पर नोटिस भी जारी किया गया है। इधर, डीआई ने बताया कि मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई की जा रही है। तीन दिन के अंदर सभी प्रकार के कागजात प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मौके पर जरूरी दवाओं को रखने के लिए मेडिकल स्टोर पर फ्रिज भी नहीं पाया गया।