आरएसएस के जिला प्रचारक पर हमले के आरोपियों को जमानत मिल गई है। पुलिस ने डकैती व जानलेवा हमले की धाराओं में रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने इन धाराओं में अपराध होना नहीं पाया। कोर्ट ने टिप्पणी की मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी कोई चोट परिलक्षित नहीं है, जिससे यह साबित हो कि हमला जानलेवा था।
बता दें कि एक फरवरी को आरएसएस के जिला प्रचारक जयकिशोर के साथ मारपीट की गई थी। नवल नगर में प्रवेश के दौरान गाड़ी निकालने पर विवाद हुआ था, जिसके बाद मारपीट की गई। इस प्रकरण में अजय कुलश्रेष्ठ ने सतीश उर्फ डब्बू प्रधान, सतीश के बेटे देव व तरुण तथा राकेश व सचिन के खिलाफ डकैती, जानलेवा हमले, मारपीट आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने दूसरे दिन सतीश, देव, तरुण व सचिन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और इन धाराओं में चारों के खिलाफ रिमांड प्रस्तुत किया था। सीजेएम कोर्ट ने प्रस्तुत केस डायरी, चिकित्सकीय प्रपत्र व अन्य प्रपत्रों का अवलोकन किया। अवलोकन कर कोर्ट ने टिप्पणी की कि चिकित्सकीय रिपोर्ट में वर्णित चोटों से यह साबित होता है कि जान से मारने की नीयत से हमला नहीं किया गया था।
इसके साथ ही कहा कि पक्षकारों के मध्य विवाद अचानक हुआ था, जिसमें डकैती की मंशा भी परिलक्षित नहीं होती है। डकैती के लिए न्यूनतम संख्या पांच होनी चाहिए, जबकि पीड़ित के बयानों में चार लोगों का जिक्र है। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने ये धाराएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद मंगलवार को हुई सुनवाई में चारों आरोपियों को जमानत दे दी गई है।