संत पंडित गया प्रसाद महाराज को बृज आंचल के परम संत के नाम से जाना जाता है। उनके हाथरस जिले में हजारों की संख्या में अनुयायी है। उनको करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि पंडित गया प्रसाद महिलाओं से दूरी बनाकर रहते थे और कभी महिलाओं से पैर स्पर्श नहीं कराते थे।
विशेष सत्र बुलाकर संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण बिल पास कराकर नारी वंदन किया जा रहा है। दूसरी ओर हाथरस के संत गया प्रसाद मंदिर में प्रबंधन ने महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। अब इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर महिला पालिकाध्यक्ष को चरण सेवक बताते हुए बोर्ड लगाने पर नया विवाद शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
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दो साल पहले नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा ने शहर के प्राचीन घंटाघर स्थित चौक पर संत पंडित गया प्रसाद महाराज के मंदिर का निर्माण कराया था। इस मंदिर पर आज भी सुबह-शाम सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। शाम को आरती व संकीर्तन होता है। मंदिर गेट पर महिलाओं के प्रवेश पर रोक के पोस्टर भी चस्पा है।
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संत पंडित गया प्रसाद महाराज को बृज आंचल के परम संत के नाम से जाना जाता है। उनके हाथरस जिले में हजारों की संख्या में अनुयायी है। उनको करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि पंडित गया प्रसाद महिलाओं से दूरी बनाकर रहते थे और कभी महिलाओं से पैर स्पर्श नहीं कराते थे। दूर से ही महिलाओं को उनके दर्शन करने की अनुमति हुआ करती थी। यही वजह है कि गोवर्धन आश्रम सहित उनके मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक है। अब नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता चौधरी द्वारा पंडित जी के मंदिर के बाहर लगे बोर्ड पर चरण सेवक श्वेता चौधरी लिखवाकर एक नए विवाद को हवा दे दी है।
श्रीकृष्ण की भक्ति कैसे की जाती है। यह जानना हो तो संत गया प्रसाद जी का जीवन इसका उदाहरण है। पूज्य संत गया प्रसाद महाराज महिलाओं से दूरी रखते थे। दूर से ही महिलाएं उनके दर्शन कर सकती थी।-आचार्य सीपु जी महाराज
पूज्य संत पंडित गया प्रसाद महाराज में हजारों लोगों की आस्था है। उन्होंने कभी भी महिलाओं से चरण स्पर्श तक नहीं कराया। यहीं वजह है कि आज भी उनके आश्रम में महिलाएं बाहर से ही दर्शन करती हैं।-पंडित पंकज शास्त्री, धार्मिक विद्वान
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं हैं। इस प्रकरण और वहां मेरा नाम किसने लिखवाया, इसकी जानकारी कर रही हूं। -श्वेता चौधरी, पालिकाध्यक्ष