सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और फिल्म देखने आने वाले दर्शकों को राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होने का सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने का हर वर्ग के लोगों ने स्वागत किया है। अधिवक्ताओं और शिक्षकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से लोगों के अंदर देशभक्ति जागृत होगी और अपने भारतवासी होने का अहसास भी करेंगे।
देश के युवाओं पर पाश्चात्य संस्कृति का असर चढ़ता जा रहा है। आजकल के युवा अपने तीज, त्योहार और देश से संबंधित बातों पर ज्यादा नहीं देते हैं। भारत में न्यू ईयर और वेलेंटाइन डे आदि को मनाया जा रहा है, जबकि युवाओं को अपने देश के त्योहार धूमधाम से मनाने चाहिए।
सिनेमाघरों में भी अधिकांश युवा ही फिल्में देखने जाते हैं। ऐेसे में जब फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजेगा और दर्शक खड़े होकर राष्ट्रगान का सम्मान करेंगे तो वह अपने आप को भारतवासी होने का निश्चित ही अहसास करेंगे।
लोगों में देश भक्ति जगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की जितनी सराहना की जाए, वह कम है। युवा पाश्चात्य संस्कृति अपनाकर उनके त्योहार मनाते हैं और अपने त्योहारों को भूल रहे हैं। फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होंगे तो देश भक्ति जागेगी ही।
-उमेश गुप्ता एडवोकेट, अध्यक्ष, डिस्ट्रिक्ट बार
-राष्ट्रगान के प्रति सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सराहनीय है। राष्ट्रगान का हम सभी को सम्मान करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद लोगों में देश प्रेम की जागृति आएगी। सिनेमा हॉल ही नहीं, बल्कि जहां भी राष्ट्रगान बजे, वहां लोगों को खड़े होकर सम्मान करना होगा।
-स्वतंत्र कुमार गुप्त, राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक
भारत के युवा ही देश की संस्कृति भूलते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राष्ट्रहित में है और इसे हर वर्ग के लोगों को मानना चाहिए। साथ ही हर जगह अपने देश की गरिमा बनाए रखना चाहिए। सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना और खडे़ होकर सम्मान करना देश भक्ति जगाएगा।
-राजेश सक्सेना, अधिवक्ता