एमजी पॉलिटेक्निक में सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एग्रीक्लचर, इलेक्ट्रॉनिक इंजनियरिंग, मैकेनिकल ऑटो, मैकेनिकल प्रोडक्शन, मैकेनिकल रेफ्रिरेजेशन व एयर कंडीशन के अलावा कंप्यूटर साइंस ट्रेड में करीब 1600 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। कॉलेज में करीब 155 छात्राएं भी तीन ट्रेड में अध्यनरत हैं।
इन ट्रेडों में सबसे खराब रहा परिणाम
इलेक्ट्रिक प्रथम वर्ष में कुल 150 में से सिर्फ 17 ही हुए पास।
मैकेनिकल (ऑटोमोबाइल) प्रथम वर्ष में कुल 110 में पांच हुए पास।
मैकेनिकल आरएसी प्रथम वर्ष में कुल 21 में से एक ही छात्र हुआ पास।
जांच के लिए लखनऊ भेजी जाती हैं उत्तर पुस्तिकाएं
पॉलिटेक्निक प्रशासन की मानें तो कुल तीन वर्ष के डिप्लोमा कोर्स में छह सेमेस्टर की परीक्षा होती हैं। सभी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं यहां से सील कर लखनऊ भेज दीं जातीं हैं, जहां से इनको अलग-अलग केंद्रों में भेज कर चेक कराया जाता है और अंक दिए जाते हैं।
बहुत अधिक संख्या में विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया है। यह तंत्र की गलती से हुआ है। हमारी मांग है कि पुन: जांच के लिए फीस माफ की जानी चाहिए। परीक्षा परिणाम दोबारा जारी किया जाना चाहिए।-तुषार वार्ष्णेय, छात्र इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रथम वर्ष।
उत्तर पुस्तिकाएं ठीक से चेक की जानी चाहिए। द्वितीय व तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के परिणाम में बैक पेपर का ऑप्शन नहीं लगाया जाना चाहिए। इससे उनकी एक साल की मेहनत खराब हो रही है। उन्हें निशुल्क पुन: प्रवेश दिया जाना चाहिए। -अमर कुमार, छात्र इलेक्ट्रिकल द्वितीय वर्ष।
कांपियां लखनऊ जाती हैं, जहां इनकी जांच होती है। सभी छात्र पास होना चाहते हैं, इस तरह पास किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। कुल परीक्षा परिणाम 52 फीसद से ऊपर रहा है। प्रथम वर्ष का परिणाम अधिक खराब है। छात्रों की मांग है कि री चेकिंग निशुल्क की जाए।-ईश्वर दयाल, चीफ प्रोक्टर, एमजी पॉलिटेक्निक, हाथरस।
44 फीसदी विद्यार्थी फेल हुए हैं। परीक्षा यहां हुई थी और कॉपियां बाहर चेक हुईं थी। फिर से कॉपियों की स्क्रूटनी कराने का प्रयास किया जाएगा। -नीरज शर्मा, एसडीएम।