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गोली खाते ही विद्यार्थियों की हालत बिगड़ी

Sun, 11 Sep 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला, हाथ्ारस
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वाहनपुर के कृषक कन्या इंटर कॉलेज में एलबेंडाजोल गोली खाकर बीमारी हुई छात्राओं को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाते हुए। - फोटो : amar ujala
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा शनिवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर एक से 19 साल तक के बच्चों को पेट के कीड़े मारने की गोलियां खिलाईं गईं। दवा खाते ही हाथरस जंक्शन के गांव वाहनपुर के कृषक कन्या इंटर कॉलेज के करीब 25 से अधिक छात्र-छात्राओं की तबियत बिगड़ गई। दवा खाने के बाद कुछ छात्राएं उल्टिंया करने लगीं तो कुछ ने पेट और सिर दर्द की शिकायत की।
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कई छात्राओं को चक्कर आने के साथ उल्टी भी हुईं। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन सभी छात्राओं को गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के बाद जिला अस्पताल भी लाया गया। जिला अस्पताल में डीएम, सीएमओ, एसडीएम व चिकित्सकों ने पहुंचकर बच्चों की स्थिति का जायजा लिया। इस मामले को लेकर तल्ख दिखे डीएम ने डॉक्टरों से भी पूछताछ की।

जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब डेढ़ लाख बच्चों को एलबेंडाजोल की टैबलेट खिलाए जाने का लक्ष्य रखा गया था। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हाथरस जिले के सरकारी व परिषदीय स्कूलों व इंटर कॉलेजों में बच्चों को दवा का वितरण कराने के लिए दो दिन पहले ही स्टॉक भेजा गया था। शनिवार की सुबह स्कूलों में शिक्षकों द्वारा इस दवा का वितरण बच्चों को कर दिया गया। दो साल से कम उम्र के बच्चों को 200 मिग्रा और उससे अधिक की उम्र के बच्चों को 400 मिग्रा की टैबलेट खाने के लिए दी गई।
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हाथरस जंक्शन के महौ सीएचसी के गांव वाहनपुर के कृषक कन्या इंटर कॉलेज में भी दवा का वितरण शिक्षकों द्वारा किया गया था। दवा खाने के बाद कुछ छात्राएं पेट दर्द की शिकायत करने लगी, तो कुछ छात्राआें को उल्टी हो गईं। यह देखकर कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन फानन में पीड़ित कुछ बच्चों को हाथरस जंक्शन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया, तथा कई बच्चों को सीधे 102 व 108 एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल लाया गया। सीएमओ की देखरेख में यहां बच्चों को आवश्यक दवाएं देकर उपचार किया गया।

उपचार के बाद बच्चों की हालत में सुधार था। इधर छात्राओं के अभिभावाकों में भी काफी गुस्सा था। इन अभिभावकों का आरोप था कि कॉलेज में बिना पानी के ही छात्राओं को गोली खिलाई गईं। अस्पताल में मौके पर डीएम अविनाशकृष्ण सिंह और एसडीएम राकेश गुप्ता भी पहुंच गए। इन अधिकारियों ने बच्चों से उनके स्वास्थ्य के बारे में हालचाल पूछा। बच्चों की हालत में सुधार होने तक अफसर अस्पताल में ही जमे रहे।
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