फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hathras News: एफआईआर पर रोक से बढ़ी सियासी हलचल तेज

Thu, 23 Jul 2026 02:04 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
विज्ञापन
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
विज्ञापन
अलीगढ़ रोड स्थित करोड़ों रुपये की कीमती भूमि जमुना बाग के विवाद में चार जून को दर्ज हुई हाई-प्रोफाइल प्राथमिकी पर हाईकोर्ट से अंतरिम रोक लगने के बाद जिले में सियासी सरगर्मियां फिर तेज हो गई हैं। यह प्रकरण करीब डेढ़ दशक से दो सियासी खेमों के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।
विज्ञापन

जमीन विक्रेता हनुमान प्रसाद पोद्दार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत से मिले इस आदेश के बाद हाथरस के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 16 जुलाई को यह स्टे मिला है, जिस पर 30 जुलाई सुनवाई की तिथि लगी है।

पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय की शिकायत पर चार जून को कोतवाली हाथरस गेट में पूर्व सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा और जमीन विक्रेता हनुमान प्रसाद पोद्दार समेत आठ नामजद व अन्य अज्ञात राजस्व कर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अभिलेखों में हेराफेरी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
विज्ञापन

आरोप था कि वर्ष 2009 में खरीदी गई जमीन के मूल सरकारी नक्शे को बदलकर मुख्य मार्ग (फ्रंट) के रास्ते को गायब किया गया और करोड़ों की भूमि पर अवैध कब्जा व प्लॉटिंग का षड्यंत्र रचा गया।

एफआईआर दर्ज करने के बाद से पुलिस पूरे प्रकरण पर शांत थी। पुलिस के लिए भी यह मामला सिरदर्द बन गया था। मुकुल व आशीष की पुरानी रार फिर एक बार सामने आ गई थी। इस मामले को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद जहां आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली है, वहीं शहर में इस हाई-प्रोफाइल कानूनी जंग को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चरम पर हैं।

बसपा शासनकाल में बाहुबल के आधार पर बैनामा कराया गया था। मामला पहले से सिविल कोर्ट में लंबित है। पूर्व की जांचों को छिपाकर झूपी एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। इस झूठी एफआईआर पर हाईकोर्ट ने स्टे देकर न्याय किया है।
-हनुमान प्रसाद पोद्दार, व्यापारी

यह कार्रवाई आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने और द्वेष भावना के तहत कराई गई थी। हमारे खिलाफ कोई कानूनी आधार नहीं है और हमें अदालत पर पूरा भरोसा है।

-देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व विधायक व सपा नेता
प्रशासनिक जांचों में सरकारी दस्तावेजों और नक्शे के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है। साक्ष्यों के आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। स्टे से साफ है कि कोर्ट ने हमारी एफआईआर को माना है।
विज्ञापन


मुकुल उपाध्याय, पूर्व एमएलसी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें