आज और कल मनेगी जन्माष्टमी, घर-घर में तैयारी
गुरु और आ जाते तो बन जाता कान्हा के जन्म जैसा पूर्ण संयोग
रोहिणी नक्षत्र और सूर्य चंद्र के उच्च के अलावा बस गुरु की रह गई कमी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास रहेगी। जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को सूर्य और चंद्रमा उच्च भाव में विराजमान हो रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र में ही द्वापर युग में कान्हा का जन्म हुआ था। विद्वानों के अनुसार वर्षों बाद जन्माष्टमी पर गुरु ग्रह का संयोग भी हो जाता तो द्वापर युग की तरह ही पूर्ण संयोग बन जाते। इस बार देर रात बन रहे रोहिणी नक्षत्र का मान उदया तिथि की वजह से 24 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मनाया जाएगा। हालांकि कुछ जगहों पर 23 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाए जाने की तैयारी की जा रही हैं।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा के उच्च होने से उच्च अद्भुत संयोग बन रहा है। यह सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ति योग है, जिसमें भगवान कृष्ण की आराधना से विशेष फल प्राप्त होगा। भगवान कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि को हुआ था, इसलिए भाद्रपद मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र का संयोग शुभ माना गया है। उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि के साथ सूर्य और चंद्रमा ग्रह भी उच्च राशि में है। यदि इस संयोग में गुरु ग्रह और आ जाता तो वहीं स्थिति बन जाती हो जो द्वापर में भगवान कृष्ण के जन्म पर थी।
पांच प्रमुख ग्रहों का हो रहा मिलन
हाथरस। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पांच प्रमुख ग्रहों का मिलन हो रहा है। आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि चंद्रमा, सूर्य, मंगल, शुक्र और बुध का मिलन हो रहा है। ऐसा संयोग करीब सौ साल बाद बन रहा है, जिसमें चंद्रमा और सूर्य दोनों ग्रह उच्च के और शुभग्राही हैं। मंगल, शुक्र और बुध अपनी मित्र राशि में हैं। रोहिणी नक्षत्र सर्वार्थ, अमृत सिद्ध योग भी है। इस बार रोहिणी नक्षत्र 55 घड़ी है। रोहिणी नक्षत्र 24 अगस्त को सुबह चार बजे से दूसरे दिन सुबह चार बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
उदया तिथि के कारण 24 को अष्टमी
हाथरस। जिस दिन रोहिणी नक्षत्र होता है उस दिन जन्माष्टमी मनाई जाती है। ऐसा शास्त्र मत है। भगवान कृष्ण जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी को हुआ था। इस बार 24 अगस्त को बहुत अच्छा योग है। जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी उदया तिथि में होन के कारण 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
-आचार्य बल्लभ जी महाराज