जिले के एक कोल्ड स्टोर में रखा आलू। संवाद
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प्रतिकूल मौसम, कभी बेमौसम बारिश तो कभी ओलावृष्टि फसलों को बर्बाद कर रही है। इनसे फसल बची तो बाजार की मंदी किसानों की कमर तोड़ रही है।पिछले कुछ सालों से किसान इस मार का दर्द झेल रहे हैं। वर्ष 2020 में बागपुर के 69 वर्षीय किसान हरीशंकर चतुर्वेदी ने 22 बीघा खेत में आलू की फसल उगाई थी। फसल कटने के समय हुई बेमौसम बारिश ने सब कुछ तबाह कर दिया। खेतों में पानी भर गया और हरीशंकर की मेहनत सड़ने लगी। उन पर बैंक का करीब 5 लाख रुपये का कर्ज था। फसलों की बर्बादी का सदमा उनका दिल सह नहीं पाया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें आगरा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
धान की बर्बादी ने उजाड़ा परिवार
सासनी कोतवाली क्षेत्र के रूहल गांव में ऐसी ही एक और घटना हुई पिछले साल हुई थी। भारी बारिश के कारण 36 वर्षीय किसान अशोक कुमार की 60 बीघा धान की फसल नष्ट हो गई। फसल बर्बाद होने से अशोक पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। वह कई दिनों तक मानसिक तनाव में रहे। आठ अक्तूबर की सुबह करीब पांच बजे परिवार ने कमरे का दरवाजा खोला तो अशोक का शव फंदे से लटकता मिला। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। संवाद