सोलर पैनल आंधी में उखड़कर पड़ोसी के मकान पर जा गिरा और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सिस्टम पर 25 साल की वारंटी दी गई थी, लेकिन महज कुछ दिनों में इसके ध्वस्त होने पर जब कंपनी से शिकायत की गई तो उन्होंने हाथ खड़े कर लिए। डीलर ने इसे सही करने या नया लगाने से मना कर दिया, जिसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी रास्ता अपनाया।
हाथरस जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सोलर पैनल लगाने वाली कंपनी अडानी कॉरपोरेट्स हाउस अहमदाबाद और डीलर की सेवा में कमी पाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने दोनों विपक्षियों को आदेश दिया है कि वे या तो नया सोलर पैनल लगवाएं या उपभोक्ता की पूरी धनराशि ब्याज सहित वापस करें।
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शहर के रोशन विहार सपना शर्मा ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत घर की छत पर अडानी कंपनी का सोलर प्लांट लगवाने के लिए स्थानीय डीलर गोपालजी एंटरप्राइजेज से संपर्क किया था। उपभोक्ता ने किश्तों में कुल 1,40,000 रुपये का भुगतान किया था। सोलर सिस्टम 28 अप्रैल 2025 को इंस्टॉल किया गया। इंस्टॉलेशन के कुछ दिन बाद ही 21 मई 2025 आई एक आंधी में पूरा प्लांट उखड़कर पड़ोसी के मकान पर जा गिरा और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
परिवादी का आरोप था कि सिस्टम पर 25 साल की वारंटी दी गई थी, लेकिन महज कुछ दिनों में इसके ध्वस्त होने पर जब कंपनी से शिकायत की गई तो उन्होंने हाथ खड़े कर लिए। डीलर ने इसे सही करने या नया लगाने से मना कर दिया, जिसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी रास्ता अपनाया। डीलर ने नोटिस लेने से इंकार कर दिया और कंपनी से कोई जवाब नहीं आया।
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मामले की सुनवाई के दौरान मौका देने पर अडानी कॉरपोरेट्स हाउस अहमदाबाद की ओर से आयोग के समक्ष कोई उपस्थित नहीं हुआ और न ही अपना पक्ष रखा। इस पर कोर्ट ने साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया था। प्रकरण में अध्यक्ष राकेश कुमार (चतुर्थ) और सदस्य कृष्णप्रभाकर उपाध्याय की पीठ ने एकपक्षीय निर्णय सुनाते हुए कहा कि सोलर प्लांट का इतनी जल्दी उखड़ जाना इसके सही ढंग से स्थापित न होने को दर्शाता है।
आयोग ने आदेश जारी करते हुए कहा कि कंपनी व डीलर दो माह के भीतर उपभोक्ता के यहां नया सोलर पैनल लगाएं। यदि ऐसा नहीं होता है, तो उन्हें 1,40,000 रुपये की पूरी राशि सात फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ वापस करनी होगी। उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए 50 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा। वाद व्यय व कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अलग से देने होंगे।