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साबुन-सर्फ : कीमत वही पर पैकेट हुए छोटे

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शहर की दुकान पर सजे साबुन।  संवाद - फोटो : Samvad
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अब साबुन-सर्फ जैसे रोजमर्रा के उपयोग वाले उत्पादों पर भी महंगाई का असर दिखाई देने लगा है। कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी करने की बजाय पैकेट का वजन कम कर रही हैं। बाजार में पहले जहां 200 ग्राम के पैकेट मिलते थे, वहीं अब कई उत्पाद 150 ग्राम या इससे कम वजन में उपलब्ध हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि बीते कुछ समय से पैकेजिंग सामग्री, खाद्य एवं औद्योगिक तेलों तथा विभिन्न रसायनों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां सीधे कीमत बढ़ाने के बजाय पैकिंग का आकार छोटा कर रही हैं, जिससे ग्राहकों को पहली नजर में कीमत समान लगती है, लेकिन वास्तविक रूप से प्रति ग्राम उत्पाद पहले की तुलना में महंगा पड़ रहा है।
कई ब्रांड के नहाने वाले साबुन, कपड़े धोने के साबुन और डिटर्जेंट पाउडर के पैकेटों में वजन कम हो गया है। पहले जो पैकेट 200 ग्राम में मिलते थे, उनमें अब 150 ग्राम या 170 ग्राम तक ही सामग्री उपलब्ध है। डिटर्जेंट पैक में भी मात्रा घटाई गई है।
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पहले और अब
-पहले 200 ग्राम का साबुन, अब कई ब्रांड में 150-175 ग्राम।
-डिटर्जेंट के छोटे पैक का वजन भी 10 से 25 प्रतिशत तक घटा।
-कीमत में मामूली बदलाव, लेकिन प्रति ग्राम लागत बढ़ी।

कंपनियों ने कई उत्पादों का वजन कम कर दिया है। ग्राहक जब पुराना और नया पैकेट देखते हैं तो उन्हें फर्क समझ आता है। लोग शिकायत करते हैं।
संजय मित्तल, जनरल स्टोर संचालक, सासनी गेट।
साबुन-डिटर्जेंट की बिक्री पहले जैसी ही है, लेकिन ग्राहक पैकेट पर लिखे वजन को पढ़ रहे हैं। कंपनियां लागत का हवाला देकर सामग्री कम कर रही हैं।
-संजय कुमार, किराना व्यापारी, भूरापीर।
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