एडीजे विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट हर्ष अग्रवाल ने आठ साल पुराने मामले में सभी सातों अभियुक्तों को एससी/एसटी एक्ट के आरोप से दोषमुक्त किया है। वहीं मारपीट व अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुआ परिवीक्षा पर रिहा किया है।
नगला भागे, सिकंदराराऊ के रहने वाले महीपाल ने पांच जुलाई 2016 को कोतवाली सिकंदराराऊ में मारपीट व जातिसूचक शब्द प्रयोग करने के आरोप में सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। महीपाल सिकंदराराऊ के मोहल्ला ब्राह्मणपुरी में कपड़े धुलाई व प्रेस की दुकान चलाते थे। आरोप है कि घटना वाले दिन अमन, नीटू, परवेज, समीर सहित सात लोग दुकान पर आए और कपड़े जल्दी तैयार न होने को लेकर विवाद करने लगे। इस दौरान मारपीट की तथा जातिसूचक शब्द कहे। बचाव करने आए लोगों को भी पीटा।
कोर्ट ने गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अभियुक्त अमन, नीटू, परवेज, समीर, नदीम, मुसाहिद और सनील को बलवा, मारपीट, धमकाने व खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाने के आरोप में दोषी पाया। सभी को इस शर्त के साथ छह माह की सदाचरण की परिवीक्षा पर रिहा किया गया है कि वे इस अवधि में शांति बनाए रखेंगे और किसी भी प्रकार के अवैधानिक कृत्य में संलिप्त नहीं होंगे।
वहीं, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि घटना दुकान के अंदर निजी दायरे में हुई थी और वहां कोई स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह मौजूद नहीं था। इससे अधिनियम के तहत सार्वजनिक दृष्टि का तत्व साबित नहीं होता। इस आधार पर सभी अभियुक्तों को एससी/एसटी एक्ट के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया।