स्टेट बैंक की लाड़पुर शाखा में हुए अग्निकांड ने एक बार फिर बैंकों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या वाकई जिले के बैंक इस तरह के अग्निकांड से निपटने के लिए तैयार हैं। क्या उनमें मौजूद अग्नि सुरक्षा के साधन महज दिखावटी हैं।
बैंकों के प्रबंधन के अलावा जिला प्रशासन को भी इन सवालों के जवाब तलाशकर इन खामियों को दूर कराने पर ध्यान देना होगा, वरना भविष्य में इस तरह के अग्निकांड की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।
जिले की किसी भी बैंक शाखा में इस तरह के अग्निकांड का मतलब है वहां मौजूद ग्राहकों की जमा पूंजी और उनके बेशकीमती डाटा को जबर्दस्त नुकसान पहुंचना। लिहाजा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बैंकों को अग्निसुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह फिट रखना बेहद जरूरी है।
जिले के ज्यादातर बैंकों में अग्नि सुरक्षा के नाम पर उपकरण तो हैं, लेकिन ये उपकरण दिखावटी ज्यादा हैं या फिर बैंक का स्टाफ इन्हें सही से चलाना भी नहीं जानता। यही वजह है कि लाड़पुर एसबीआई की शाखा में हुए अग्निकांड में नुकसान ज्यादा हो गया। यह बात भी साबित हो गई कि प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने लंबे समय से बैंकों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों को नहीं परखा है।