कोर्ट परिसर की सुरक्षा में बैठे पुलिस कर्मी मोबाइल और बातों में व्यस्त
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लखनऊ के न्यायालय में हुए हत्याकांड के बाद यहां भी न्यायालय परिसर में सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता बढ़ गई है। पूर्व में जनपद न्यायालय परिसर में कई दुस्साहसिक वारदातें हो चुकी हैं। इनके मद्देनजर यहां सुरक्षा इंतजाम चाक-चौबंद होना जरूरी है। अधिवक्ताओं ने भी सुरक्षा इंतजामों को लेकर चिंता जाहिर की है।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले दीवानी न्यायालय परिसर में एक अधिवक्ता की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पेशी पर आए दो अभियुक्तों को हमलावरों ने गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था।
हालांकि पुलिस ने लोगों के सहयोग से हमलावरों को भी मार दिया था। ऐसे में दीवानी न्यायालय परिसर में सुरक्षा इंतजामों का पुख्ता होना बेहद जरूरी है। वैसे भी यह परिसर चारों ओर से खुला हुआ है। कोई भी यहां वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल सकता है। ऐसे में जरूरी है कि किला परिसर को जाने वाले हर रास्ते पर सुरक्षा व्यवस्था कसी हुई हो।
न्यायालय परिसर में यदि समुचित सुरक्षा होती तो पूर्व में शायद ही घटनाएं होतीं। वर्तमान में भी सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। कोई भी प्रभावी सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। यहां तक कि जो पुलिसकर्मी दाऊ बाबा के मंदिर के नीचे लगाए गए हैं, उन पर हाथ में हथियार के नाम पर लाठी भी नहीं है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। -पवन कुमार शर्मा, महासचिव डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शासन-प्रशासन की नाक के नीचे हुआ हत्याकांड भारतीय न्याय व्यवस्था एवं लोकतंत्र पर हमला है। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए संपूर्ण न्यायालय क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए। खुफिया तंत्र की भी यहां सतर्क रहना चाहिए। -तरुण कुमार शर्मा, अधिवक्ता
अधिवक्ताओं की सुरक्षा कोर्ट परिसर में सुनिश्चित की जानी चाहिए। हाथरस में अभी स्थायी न्यायालय भवन नहीं बना है। अभी अस्थायी तौर पर न्यायालय भवन दाऊजी मंदिर परिसर किला क्षेत्र में संचालित है। प्रशासन को अधिवक्ताओं, अधिकारियों और वादकारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। नए न्यायालय भवन का निर्माण भी शीघ्र होना चाहिए। -विनोद शर्मा उर्फ बंटी भैया, अधिवक्ता
न्यायालय परिसर चारों तरफ से खुला हुआ है। उत्तर प्रदेश के सभी जनपद न्यायालयों में से हाथरस जनपद न्यायालय सर्वाधिक असुरक्षित है। कोई भी घटना को अंजाम देकर आराम से आ-जा सकता है, लेकिन जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा कभी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यह चिंता का विषय है। यहां सुरक्षा की समीक्षा होनी चाहिए। -लक्ष्मीनारायण शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
लखनऊ की घटना के मद्देनजर हाथरस जनपद न्यायालय में अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जानी चाहिए, क्योंकि पूर्व में जनपद न्यायालय परिसर में अधिवक्ता व वादकारियों पर हमला हो चुका है। पूर्व में घटी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। -रामदास , वरिष्ठ अधिवक्ता
न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होना अति आवश्यक है। यहां हर किस्म अपराधी पेशी पर आते हैं। पहले भी यहां परिसर में वारदातें हो चुकी हैं। पुलिस प्रशासन को गंभीरता पूर्वक न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और सुरक्षा उपकरण भी लगाए जाने चाहिए। -मनमोहन शर्मा, अधिवक्ता