टीबी के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने और मरीजों के संपर्क में रहने वाले उनके परिजनों व पड़ोसियों को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में स्क्रीनिंग अभियान को और तेज कर दिया है। सीएचओ, आशा और एएनएम घर-घर जाकर टीबी मरीजों के संपर्क में रह रहे लोगों का ब्योरा जुटा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अब तक जिले में 3760 मरीज टीबी के सामने आए हैं। इनमें से करीब दो हजार का वर्तमान में उपचार चल रहा है। विभाग ने इन मरीजों के 4435 करीबियों को टीपीटी के अंतर्गत दवा दी है। टीबी मरीज के साथ एक ही घर में रहने वाले परिजनों और उनके आसपास रहने वाले पड़ोसियों में संक्रमण फैलने का सबसे अधिक जोखिम रहता है।
इसी खतरे को टालने के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) योजना शुरू की गई। वर्ष 2025 से अब तक 9.5 हजार लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए एहतियातन दवा खिलाई जा चुकी है।
इसलिए है जरूरी टीपीटी
टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट उन लोगों को दिया जाता है, जिनमें टीबी के एक्टिव लक्षण तो नहीं होते, लेकिन मरीज के करीब रहने के कारण उनके शरीर में टीबी के बैक्टीरिया सुप्त अवस्था में हो सकते हैं। टीपीटी की दवाएं लेने से यह सुप्त बैक्टीरिया खत्म हो जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कम इम्युनिटी वाले लोगों को इस दवा से विशेष सुरक्षा मिलती है।
जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए टीपीटी के अंतर्गत दवाएं लेना आवश्यक है, जिससे साथ रहने वालों में टीबी को फैलने से रोका जा सके, इसलिए टीबी मरीजों के आसपास स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
-डाॅ. प्रवीण भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी